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ईरान युद्ध पर यूरोप का बड़ा बयान: अमेरिका-इजरायल टकराव में अब तक रूस ही असली विजेता

एबीसी नेशनल न्यूज | अंतरराष्ट्रीय डेस्क | 10 मार्च 2026

मध्य-पूर्व में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनावपूर्ण संघर्ष को लेकर यूरोप से बड़ा राजनीतिक बयान सामने आया है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा ने कहा है कि अब तक इस युद्ध से अगर किसी देश को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है, तो वह रूस है। उनका कहना है कि इस जंग ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां रूस को कई मोर्चों पर अप्रत्याशित लाभ मिल रहा है।

ऊर्जा संकट और तेल की कीमतों से रूस को फायदा

कोस्टा के मुताबिक इस युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची है। तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और यही स्थिति रूस के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। रूस दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा निर्यातकों में से एक है, इसलिए तेल-गैस के महंगे होने से उसके राजस्व में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे उसे अपने सैन्य अभियानों के लिए अतिरिक्त आर्थिक संसाधन मिलेंगे।

यूक्रेन युद्ध से ध्यान हटना भी रूस के लिए लाभ

यूरोपीय परिषद प्रमुख ने यह भी कहा कि मध्य-पूर्व की जंग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान यूक्रेन युद्ध से काफी हद तक हटा दिया है। इससे रूस को रणनीतिक फायदा मिल रहा है, क्योंकि पश्चिमी देशों की राजनीतिक और सैन्य प्राथमिकताएं अब विभाजित हो गई हैं। अमेरिका और उसके सहयोगियों की सैन्य क्षमताओं का एक हिस्सा अब मध्य-पूर्व में व्यस्त हो गया है, जिससे यूक्रेन को मिलने वाली मदद पर असर पड़ सकता है।

यूरोप की चेतावनी: युद्ध से बढ़ेगी वैश्विक अस्थिरता

कोस्टा ने चेतावनी दी कि अगर यह संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि युद्ध की यह आग यूरोप समेत पूरी दुनिया को अस्थिर कर सकती है। इसलिए सभी पक्षों को जल्द से जल्द बातचीत की मेज पर लौटना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर भी उठे सवाल

यूरोपीय नेतृत्व का मानना है कि लगातार बढ़ते सैन्य टकराव से अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था पर भी खतरा मंडरा रहा है। कोस्टा ने कहा कि “मानवाधिकार और स्वतंत्रता बमों से नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीति से सुरक्षित रह सकते हैं।” यही वजह है कि यूरोप इस संकट के समाधान के लिए कूटनीतिक रास्ते पर जोर दे रहा है।

कुल मिलाकर, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा यह टकराव केवल क्षेत्रीय युद्ध नहीं रह गया है। ऊर्जा बाजार, वैश्विक कूटनीति और यूक्रेन युद्ध तक इसके असर दिखाई दे रहे हैं—और फिलहाल कई विश्लेषकों की तरह यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष का भी मानना है कि इस पूरी स्थिति का सबसे बड़ा लाभार्थी रूस बनता दिख रहा है।

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