अंतरराष्ट्रीय | लुबना आबिदी | ABC NATIONAL NEWS | लंदन | 2 मई 2026
इंग्लैंड में दवाओं की उपलब्धता को लेकर संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई जरूरी दवाएं बाजार में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं, जिससे मरीजों को इलाज में देरी और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे पिछले कई वर्षों का सबसे नाजुक दौर बताया है। डॉक्टरों और फार्मासिस्टों का कहना है कि यह समस्या अब व्यापक हो चुकी है। एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक और डायबिटीज तथा हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारियों की दवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। कई मरीजों को एक ही दवा के लिए कई फार्मेसियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जबकि कुछ को वैकल्पिक दवाओं पर निर्भर होना पड़ रहा है। इस शॉर्टेज के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाएं हैं, जिनके चलते दवाओं के कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके अलावा, ब्रेक्जिट के बाद आयात-निर्यात नियमों में आए बदलाव ने यूरोप से दवाओं की आपूर्ति को धीमा कर दिया है।
दूसरी ओर, ऊर्जा और परिवहन लागत में वृद्धि ने दवा कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ा दी है, जिससे कई कंपनियों ने कुछ दवाओं का उत्पादन सीमित कर दिया है। कम कीमत वाली जेनेरिक दवाओं पर मुनाफा कम होने के कारण कंपनियां उन्हें पर्याप्त मात्रा में नहीं बना रहीं, जिससे बाजार में उनकी कमी और बढ़ गई है।
इसके साथ ही, मांग में अचानक वृद्धि भी एक बड़ी वजह बनकर सामने आई है। सर्दी-जुकाम और संक्रमण से जुड़ी बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी के कारण एंटीबायोटिक्स और अन्य दवाओं की मांग बढ़ गई, जबकि आपूर्ति उसी गति से नहीं बढ़ पाई।
सरकार ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए कहा है कि दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग वैकल्पिक सप्लाई चैन विकसित करने और दवा कंपनियों के साथ समन्वय बढ़ाने पर काम कर रहा है।
यदि जल्द ही ठोस और दीर्घकालिक उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है। फिलहाल, इंग्लैंड की स्वास्थ्य व्यवस्था इस चुनौती से जूझ रही है और मरीजों के लिए समय पर दवाएं उपलब्ध कराना एक बड़ी परीक्षा बन गया है।




