अंतरराष्ट्रीय | गुफरान अहमद | ABC NATIONAL NEWS | लंदन | 2 मई 2026
लंदन। लंदन के एक छोटे से फ्लैट में रहने वाली सारा पिछले तीन साल से एक ही डर के साथ जी रही थी—कभी भी मकान मालिक बिना वजह नोटिस देकर उसे घर से निकाल सकता है। लेकिन 1 मई की सुबह उसके लिए अलग थी। उस दिन इंग्लैंड में नए किरायेदारी कानून लागू हुए, और सारा जैसे लाखों किरायेदारों को पहली बार यह भरोसा मिला कि उनका घर अब सिर्फ एक किराया समझौता नहीं, बल्कि एक सुरक्षित ठिकाना भी है।
सरकार ने इन नए नियमों को पिछले 30 साल का सबसे बड़ा बदलाव बताया है। अब “नो-फॉल्ट इविक्शन” यानी बिना कारण किरायेदार को निकालने की प्रक्रिया को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि मकान मालिक अब मनमाने तरीके से किरायेदार को घर खाली करने के लिए मजबूर नहीं कर सकेंगे।
सिर्फ सारा ही नहीं, मैनचेस्टर में रहने वाले अली की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। अली को अपने पालतू कुत्ते के कारण कई बार मकान बदलना पड़ा। लेकिन नए कानून के बाद अब किरायेदारों को पालतू जानवर रखने की अनुमति मांगने का अधिकार मिला है, और मकान मालिक बिना ठोस कारण इसे मना नहीं कर सकते।
इन बदलावों के साथ-साथ सरकार ने मकानों की गुणवत्ता को लेकर भी सख्त नियम लागू किए हैं। अब मकान मालिकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किराये का घर रहने लायक हो—नमी, गंदगी या खराब सुविधाओं जैसी समस्याएं अब अनदेखी नहीं की जा सकेंगी।
हालांकि, इस कहानी का दूसरा पहलू भी है। लंदन के ही एक मकान मालिक जेम्स का कहना है कि नए नियमों से उनका नियंत्रण कम हो जाएगा। उनका मानना है कि अगर किरायेदार को निकालना मुश्किल हो गया, तो कई मकान मालिक अपने घर किराये पर देने से पीछे हट सकते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव संतुलन की परीक्षा है—एक तरफ किरायेदारों को सुरक्षा और अधिकार मिल रहे हैं, तो दूसरी तरफ मकान मालिकों के लिए नई चुनौतियां भी खड़ी हो रही हैं।
इंग्लैंड के हाउसिंग सेक्टर में एक नई शुरुआत हो चुकी है। सारा जैसे किरायेदारों के लिए यह राहत की कहानी है, तो जेम्स जैसे मकान मालिकों के लिए एक नई वास्तविकता। आने वाले समय में यह तय करेगा कि यह बदलाव किसके लिए कितना फायदेमंद साबित होता है—लेकिन इतना तय है कि किराये के घरों की दुनिया अब पहले जैसी नहीं रहेगी।




