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केरल में जलवायु संकट के कारण पक्षियों की दर्जनों प्रजातियाँ संकट में

केरल के वायनाड, इडुक्की और साइलेंट वैली के जंगलों में पक्षियों की विविधता अब खतरे में है। जैव विविधता बोर्ड की हालिया रिपोर्ट बताती है कि लगभग 12 पक्षी प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर हैं। खासकर ‘ग्रेट हॉर्नबिल’ और ‘नीलगिरी फ्लाईकैचर’ जैसे अद्वितीय पक्षियों का देखना दुर्लभ हो गया है।

इस संकट के पीछे कारण है – लगातार घटते जंगल, अत्यधिक कीटनाशक का प्रयोग, जलवायु परिवर्तन और मानव जनित गतिविधियाँ। पक्षियों के प्रवास के मार्गों में परिवर्तन हो रहा है, और उनके भोजन व घोंसले के स्थान नष्ट हो रहे हैं। इससे पूरा पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो रहा है क्योंकि पक्षी परागण, बीज वितरण और कीट नियंत्रण में भूमिका निभाते हैं।

वाइल्डलाइफ रिसर्चर्स और स्थानीय स्वयंसेवक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि त्वरित संरक्षण उपाय नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियाँ इन पक्षियों को केवल किताबों में ही देख पाएंगी। सरकार को चाहिए कि वह पक्षियों के आवासीय क्षेत्रों को संरक्षित घोषित करे और ग्रामीण समुदायों को इस दिशा में जागरूक बनाए।

 

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