राजनीति/ उत्तर प्रदेश | शीतांशु रमन | ABC NATIONAL NEWS | लखनऊ | 9 मई 2026
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की सरकार में जल्द मंत्रिमंडल विस्तार होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार रविवार को योगी कैबिनेट का विस्तार किया जा सकता है, जिसमें छह नए चेहरों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात कर विस्तार को अंतिम रूप दे सकते हैं। योगी सरकार में 54 मंत्री हैं, जबकि छह पद खाली पड़े हुए हैं। माना जा रहा है कि आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बीजेपी सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी ऐसे नेताओं को मौका दे सकती है जो अलग-अलग जातीय और राजनीतिक समूहों में प्रभाव रखते हों।
कैबिनेट विस्तार को लेकर जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें पूर्व प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी प्रमुख हैं। जाट समुदाय के बड़े चेहरे माने जाने वाले भूपेंद्र चौधरी को पहले मंत्रिमंडल से हटाकर प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी दी गई थी। अब उनकी दोबारा सरकार में वापसी लगभग तय मानी जा रही है।
इसके अलावा फतेहपुर की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान का नाम भी चर्चा में है। दलित चेहरे के तौर पर उनकी पहचान मजबूत मानी जाती है। हाल के दिनों में खराब सड़क निर्माण के खिलाफ खुद फावड़ा लेकर सड़क तोड़ने की उनकी कार्रवाई काफी चर्चा में रही थी। बीजेपी उन्हें दलित और महिला नेतृत्व के प्रतीक के रूप में आगे बढ़ा सकती है।
कौशांबी की चायल सीट से विधायक पूजा पाल का नाम भी संभावित मंत्रियों की सूची में बताया जा रहा है। समाजवादी पार्टी से निष्कासित होने के बाद उन्होंने बीजेपी का समर्थन किया था। राजू पाल हत्याकांड के बाद राजनीति में सक्रिय हुईं पूजा पाल प्रयागराज-कौशांबी क्षेत्र में ओबीसी और महिला वोट बैंक पर प्रभाव रखने वाली नेता मानी जाती हैं।
रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडेय का नाम भी काफी मजबूत माना जा रहा है। समाजवादी पार्टी से निलंबित मनोज पांडेय ब्राह्मण समुदाय में प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी ब्राह्मण वर्ग को मजबूत संदेश देने के लिए उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दे सकती है।
पूर्व मंत्री और विधान परिषद सदस्य अशोक कटारिया की भी वापसी की संभावना जताई जा रही है। संगठन और सरकार दोनों में लंबा अनुभव रखने वाले अशोक कटारिया को युवा और संगठनात्मक संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लखीमपुर खीरी के पलिया से विधायक हरविंदर कुमार साहनी उर्फ रोमी साहनी का नाम भी चर्चा में है। थारू समाज में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है और बीजेपी आगामी चुनावों में इस समुदाय को और मजबूती से अपने साथ जोड़ने की रणनीति बना रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी का बड़ा संकेत हो सकता है। बीजेपी सामाजिक समीकरण, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और विपक्ष से आए नेताओं को साधकर व्यापक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रही है। सरकार की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है और अब सबकी नजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राजभवन की अगली गतिविधियों पर टिकी हुई है।




