राष्ट्रीय / तमिलनाडु | ABC NATIONAL NEWS | 10 मई 2026
तमिलनाडु की राजनीति में इस बार सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर तब देखने को मिला, जब अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय की पार्टी TVK ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए सत्ता के केंद्र तक पहुंच बना ली। हालांकि स्पष्ट बहुमत से कुछ सीटें दूर रह जाने के बाद कांग्रेस ने जिस तेजी से विजय को समर्थन देने का फैसला किया, उसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी। अब चर्चा सिर्फ सरकार गठन की नहीं, बल्कि राहुल गांधी और विजय के बीच 17 साल पुराने रिश्तों की भी हो रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TVK और कांग्रेस के बीच बनी यह नजदीकी अचानक नहीं उभरी, बल्कि इसकी पृष्ठभूमि 2009 में ही तैयार हो चुकी थी। बताया जाता है कि राहुल गांधी और विजय की पहली महत्वपूर्ण मुलाकात उसी दौर में हुई थी, जब राहुल कांग्रेस संगठन में युवाओं को आगे लाने की मुहिम चला रहे थे और विजय तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार बन चुके थे।
उस समय विजय की लोकप्रियता अपने चरम पर थी। “इलाया थलपति” के नाम से मशहूर विजय करीब 50 फिल्मों में काम कर चुके थे और उनके फैन क्लब सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय हो चुके थे। कांग्रेस नेताओं को लगता था कि विजय भविष्य में तमिलनाडु की राजनीति में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी और विजय की मुलाकात तत्कालीन NSUI नेता गोपीनाथ पलानीअप्पन ने कराई थी। विजय के पिता एस.ए. चंद्रशेखर का झुकाव भी कांग्रेस की ओर माना जाता था और वही विजय को राहुल गांधी से मिलने दिल्ली लेकर गए थे।
बताया जाता है कि राहुल गांधी उस समय कांग्रेस संगठन में आंतरिक लोकतंत्र और युवा नेतृत्व को मजबूत करने के अभियान में जुटे थे। वहीं विजय “विजय मक्कल इयक्कम” के जरिए सामाजिक आधार तैयार कर रहे थे, जिसे बाद में उनके राजनीतिक नेटवर्क की शुरुआती संरचना माना गया।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी और विजय के बीच हुई बातचीत एक घंटे से अधिक चली थी। दोनों ने राजनीति, युवाओं, सामाजिक बदलाव और तमिलनाडु के राजनीतिक भविष्य पर चर्चा की थी। कुछ कांग्रेस नेताओं का दावा है कि राहुल गांधी ने विजय को तमिलनाडु यूथ कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने का सुझाव भी दिया था। उस समय विजय की उम्र करीब 35 वर्ष थी और माना जा रहा था कि वे आसानी से यह चुनाव जीत सकते थे।
हालांकि DMK की तरफ से दबाव और तमिल फिल्म उद्योग पर करुणानिधि परिवार के प्रभाव के कारण विजय ने उस समय सक्रिय राजनीति में आने से दूरी बनाए रखी। उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने की खबरों का सार्वजनिक तौर पर खंडन भी किया था। बावजूद इसके राहुल गांधी और विजय के बीच संपर्क और संवाद बना रहा।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि विजय वैचारिक रूप से लंबे समय से कांग्रेस के करीब माने जाते रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि विजय ने उस दौर में धर्मनिरपेक्षता और संवैधानिक मूल्यों को लेकर सकारात्मक राय व्यक्त की थी। NSUI की तत्कालीन नेताओं के मुताबिक, विजय ने साफ कहा था कि वे सांप्रदायिक राजनीति में विश्वास नहीं करते।
साल 2009 में श्रीलंकाई तमिलों के समर्थन में विजय द्वारा चेन्नई में किया गया आठ घंटे का उपवास भी उनकी राजनीतिक संवेदनशीलता का संकेत माना गया था। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उसी समय यह स्पष्ट हो गया था कि विजय केवल अभिनेता नहीं, बल्कि भविष्य के संभावित राजनीतिक चेहरा भी हैं।
बताया जाता है कि 2024 में TVK के औपचारिक गठन के बाद राहुल गांधी और विजय के बीच फिर बातचीत हुई। विजय ने राहुल गांधी को फोन कर अपनी राजनीतिक यात्रा की जानकारी दी थी। पिछले वर्ष राहुल गांधी के जन्मदिन पर भी विजय ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से बधाई दी थी।
अब जब तमिलनाडु में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, तब कांग्रेस ने तुरंत समर्थन देकर यह संकेत दिया कि यह केवल चुनावी समझौता नहीं, बल्कि लंबे समय से बन रही राजनीतिक समझ का परिणाम है। कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन सरकार गठन में निर्णायक साबित हुआ। इसके बाद CPI, CPI(M), VCK और IUML जैसे दल भी TVK के समर्थन में सामने आ गए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस दक्षिण भारत में बीजेपी के विस्तार को रोकने के लिए विजय को एक नए क्षेत्रीय सहयोगी के रूप में देख रही है। वहीं विजय के लिए कांग्रेस का समर्थन सत्ता तक पहुंचने का सबसे स्थिर रास्ता बन गया है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या राहुल गांधी और विजय की यह पुरानी राजनीतिक समझ भविष्य में राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा असर डालेगी, या यह गठबंधन केवल तमिलनाडु की राजनीति तक सीमित रहेगा।




