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सीजफायर के बावजूद रूस-यूक्रेन में भीषण जंग जारी, दोनों देशों ने एक-दूसरे पर लगाए हमलों के आरोप

अंतरराष्ट्रीय | एजेंसी / ABC NATIONAL NEWS | मॉस्को / कीव | 12 मई 2026

अमेरिका की मध्यस्थता में हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद रूस और यूक्रेन के बीच जंग थमती नजर नहीं आ रही है। दोनों देशों ने दावा किया है कि लंबी फ्रंटलाइन पर लगातार लड़ाई जारी है और एक-दूसरे पर ड्रोन, तोपखाने और मिसाइल हमले करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। सीजफायर लागू होने के कुछ ही समय बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, जिससे युद्धविराम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि रूसी सेना ने पूर्वी और दक्षिणी मोर्चों पर कई इलाकों में ड्रोन और आर्टिलरी हमले किए। यूक्रेन ने दावा किया कि रूस ने रणनीतिक शहरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की, जिससे कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ। वहीं रूस ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि यूक्रेन ने रूसी सीमा क्षेत्रों और कब्जे वाले इलाकों पर ड्रोन हमले किए और युद्धविराम का उल्लंघन किया।

रिपोर्ट्स के अनुसार डोनेट्स्क, लुहांस्क, ज़ापोरिज्जिया और खार्किव जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार गोलाबारी की आवाजें सुनी गईं। दोनों देशों की सेनाएं कई जगहों पर आमने-सामने भिड़ी हुई हैं। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की चेतावनी जारी की है। युद्ध प्रभावित इलाकों में बिजली और संचार सेवाएं भी प्रभावित होने की खबरें हैं।

अमेरिका और पश्चिमी देशों ने हाल ही में युद्धविराम लागू कराने के लिए बड़ी कूटनीतिक कोशिशें की थीं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि यह संघर्ष को सीमित करने और बातचीत का रास्ता खोलने की दिशा में पहला कदम हो सकता है। लेकिन जमीन पर जारी हमलों ने यह साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास अब भी बेहद गहरा है।

विश्लेषकों का मानना है कि युद्धविराम की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की मंशा पर भरोसा नहीं करते। रूस का कहना है कि यूक्रेन पश्चिमी हथियारों और NATO समर्थन के दम पर युद्ध को लंबा खींच रहा है, जबकि यूक्रेन का आरोप है कि रूस युद्धविराम का इस्तेमाल अपनी सैन्य स्थिति मजबूत करने के लिए कर रहा है।

इस बीच संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डर है कि अगर युद्धविराम पूरी तरह विफल हुआ तो यह संघर्ष और ज्यादा खतरनाक मोड़ ले सकता है। पहले से ही लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और यूरोप की अर्थव्यवस्था पर भी इस युद्ध का गहरा असर पड़ा है।

रूस-यूक्रेन युद्ध अब केवल दो देशों के बीच का संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक भू-राजनीतिक टकराव का केंद्र बन चुका है। अमेरिका, NATO, यूरोप और रूस के बीच बढ़ता तनाव दुनिया को लगातार अस्थिरता की ओर धकेल रहा है। ऐसे में सीजफायर टूटने की आशंका ने वैश्विक चिंता और बढ़ा दी है। हालात यह संकेत दे रहे हैं कि कागजों पर भले युद्धविराम लागू हो गया हो, लेकिन जमीनी स्तर पर बंदूकें अब भी शांत नहीं हुई हैं।

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