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‘क्रुएल जोक’: बादल फोड़ने की योजना पर कांग्रेस का दिल्ली सरकार पर तंज, कहा – जनता के साथ मज़ाक

नई दिल्ली 2 नवंबर 2025

दिल्ली में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर और बिगड़ती वायु गुणवत्ता के बीच जब राज्य सरकार ने कृत्रिम वर्षा यानी ‘क्लाउड सीडिंग’ की घोषणा की, तो इसे लेकर राजनीति गर्मा गई है। कांग्रेस पार्टी ने इस कदम को “क्रुएल जोक” यानी जनता के साथ “क्रूर मज़ाक” बताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब राजधानी की हवा हर साल जहरीली हो जाती है और सरकार सिर्फ ‘जुमले’ और ‘शोबाजी’ में लगी रहती है, तब यह घोषणा केवल जनता को भ्रमित करने और अपनी विफलता छिपाने का प्रयास है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी की सरकार हर साल प्रदूषण के मौसम में जागती है और ‘इवेंट पॉलिटिक्स’ से आगे कोई ठोस नीति नहीं बनाती।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि “दिल्ली के लोग दम तोड़ रहे हैं और सरकार बादलों से खेल रही है।” पार्टी ने सवाल उठाया कि आखिर जब पिछले तीन वर्षों से लगातार प्रदूषण नियंत्रण योजनाएं कागज़ पर सिमटी रहीं, तो अचानक क्लाउड सीडिंग जैसे प्रयोग की घोषणा का क्या औचित्य है। उन्होंने कहा कि यह वही सरकार है जो ‘स्मॉग टावर’, ‘इलेक्ट्रिक बस’, ‘ग्रीन बेल्ट’ और ‘एंटी-डस्ट ड्राइव’ जैसी योजनाओं की बात करती रही, लेकिन धरातल पर कोई ठोस परिणाम नहीं दिखा। कांग्रेस ने इसे एक “पॉलिटिकल पब्लिसिटी स्टंट” करार दिया, जिसका मकसद मीडिया में headline बटोरना है, न कि दिल्लीवासियों को राहत देना।

दिल्ली सरकार ने हाल ही में वैज्ञानिकों के सहयोग से कृत्रिम वर्षा कराने की संभावना पर काम करने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य वायुमंडल में मौजूद प्रदूषक कणों को बारिश के ज़रिए नीचे गिराना और हवा को कुछ समय के लिए साफ करना बताया गया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि क्लाउड सीडिंग एक अत्यंत महंगा और अस्थायी उपाय है, जो केवल सीमित भौगोलिक क्षेत्रों में ही कारगर हो सकता है। कांग्रेस ने इसी तर्क को आगे बढ़ाते हुए कहा कि “सरकार हवा में समाधान ढूंढ रही है, जबकि ज़मीन पर उसका प्रशासन दम तोड़ चुका है।”

दिल्ली और एनसीआर में इस समय प्रदूषण का स्तर खतरनाक श्रेणी में पहुंच चुका है। स्कूल बंद करने, निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाने और वाहनों पर प्रतिबंध जैसे अस्थायी कदम उठाए गए हैं, लेकिन हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे। ऐसे में क्लाउड सीडिंग की घोषणा जनता के लिए राहत नहीं बल्कि चिंता का विषय बन गई है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब तक दिल्ली सरकार स्थायी समाधान — जैसे उद्योगों का स्थानांतरण, सार्वजनिक परिवहन में सुधार, और राज्यों के बीच पराली नीति पर तालमेल — नहीं करती, तब तक ये उपाय केवल दिखावे से अधिक कुछ नहीं हैं।

जनता के बीच भी इस विषय पर बहस छिड़ी हुई है। एक वर्ग इसे नवाचार की दिशा में उठाया गया कदम बता रहा है, जबकि दूसरा इसे संसाधनों की बर्बादी और राजनीतिक नाटक कह रहा है। कांग्रेस ने स्पष्ट कहा है कि “प्रदूषण पर दिल्ली सरकार की नीतियां केवल फोटोग्राफी के लिए हैं, न कि सांस लेने योग्य हवा के लिए।” पार्टी ने मांग की है कि केंद्र और राज्य मिलकर वैज्ञानिक और व्यवहारिक दीर्घकालिक नीति तैयार करें ताकि दिल्लीवासियों को हर सर्दी में इस गैस चैंबर जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

कुल मिलाकर, दिल्ली की हवा एक बार फिर राजनीति की चपेट में है। कांग्रेस का “क्रुएल जोक” वाला हमला यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में प्रदूषण पर बहस सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं रहेगी — बल्कि यह अब राजनीतिक जवाबदेही का बड़ा सवाल बन चुकी है।

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