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CRPF महिलाओं-बच्चों को पीट रही, 1984 से चुनाव लड़ रही हूं, ऐसा अत्याचार नहीं देखा : ममता बनर्जी

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राष्ट्रीय / पश्चिम बंगाल | अरिंदम | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 29 अप्रैल 2026

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने चुनावी माहौल के बीच केंद्रीय सुरक्षा बल Central Reserve Police Force (CRPF) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान राज्य के कई इलाकों में केंद्रीय बलों द्वारा महिलाओं और बच्चों के साथ मारपीट की जा रही है, जो न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ है। ममता बनर्जी ने अपने बयान में कहा कि वह वर्ष 1984 से सक्रिय रूप से चुनाव लड़ रही हैं और इस दौरान उन्होंने कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन इस तरह का कथित अत्याचार पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों और सुरक्षा बलों का इस्तेमाल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है, जिससे मतदाताओं में डर का माहौल पैदा हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनावों पर निर्भर करती है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां इस सिद्धांत के विपरीत नजर आ रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और संवेदनशील क्षेत्रों से ऐसी खबरें आ रही हैं जहां महिलाओं और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है, जिससे आम लोगों में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।

ममता बनर्जी ने Election Commission of India से इस पूरे मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करे और अगर कहीं भी किसी प्रकार की ज्यादती हो रही है तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और जरूरत पड़ने पर कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप आम होते जा रहे हैं, जिससे सियासी माहौल और अधिक गरम हो जाता है। विपक्षी दलों ने ममता बनर्जी के बयान को राजनीतिक करार देते हुए कहा है कि केंद्रीय बल केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात किए गए हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने मुख्यमंत्री के आरोपों का समर्थन करते हुए इसे गंभीर मुद्दा बताया है।

दूसरी ओर, केंद्रीय सुरक्षा बलों की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। चुनावी ड्यूटी पर तैनात बलों का कहना रहा है कि वे पूरी तरह से चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार कार्य करते हैं और उनका उद्देश्य केवल शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना होता है।

पश्चिम बंगाल में जारी चुनावी प्रक्रिया के बीच इस तरह के बयान राजनीतिक माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना सकते हैं। राज्य में पहले भी चुनावों के दौरान हिंसा और टकराव की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिसके चलते सुरक्षा व्यवस्था को सख्त किया जाता है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर चुनावी पारदर्शिता और सुरक्षा बलों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या इन आरोपों की जांच कराई जाती है या नहीं। फिलहाल, राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा चुनावी बहस के केंद्र में रहने की संभावना है।

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