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पंजाब में ‘माफियाराज’ का कांग्रेस का आरोप, अमृतसर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की हत्या से कानून-व्यवस्था पर सवाल

अपराध/ पंजाब | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 4 अक्टूबर 2026

अमृतसर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मैड संधू की बीच सड़क गोली मारकर हत्या की घटना ने पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। कांग्रेस ने इस वारदात को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि पंजाब में अपराधियों के भीतर अब कानून का डर और सजा का खौफ खत्म होता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस ने अमृतसर की हत्या को हाल ही में फाजिल्का में DSP कार्यालय पर हुई कथित फायरिंग से जोड़ते हुए सवाल उठाया है कि अगर पुलिस और पुलिस कार्यालय तक अपराधियों के निशाने से सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक अपनी सुरक्षा को लेकर किस पर भरोसा करे?

कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में पंजाब की स्थिति को ‘माफियाराज’ बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार और AAP नेतृत्व को कठघरे में खड़ा किया है। पार्टी का कहना है कि अमृतसर में सड़क पर गोली मारकर हत्या और उससे कुछ ही समय पहले फाजिल्का में DSP ऑफिस पर कई राउंड फायरिंग जैसी घटनाएं महज अलग-अलग आपराधिक वारदातें नहीं हैं, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अपराधियों में पुलिस और प्रशासन का भय कम होता जा रहा है और हत्या, लूट तथा फिरौती जैसी वारदातों को लेकर आम लोगों में असुरक्षा बढ़ रही है।

बीच सड़क पर हत्या, अपराधियों के हौसले पर कांग्रेस का सवाल

अमृतसर की घटना ने इसलिए भी चिंता बढ़ाई है क्योंकि हत्या सार्वजनिक स्थान पर गोलीबारी के जरिए की गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने मैड संधू पर फायरिंग की और उनकी हत्या कर दी। घटना से जुड़ा एक वीडियो और तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल दिखाई देता है। इस वारदात के बाद कांग्रेस ने सवाल उठाया कि अगर अपराधी सार्वजनिक स्थान पर इस तरह गोली चला सकते हैं तो क्या उन्हें पुलिस कार्रवाई का कोई डर नहीं है?

हालांकि हत्या के पीछे वास्तविक कारण क्या था, हमलावर कौन थे और इस वारदात की पूरी आपराधिक पृष्ठभूमि क्या है, इसका अंतिम निर्धारण जांच के बाद ही होगा। किसी व्यक्ति या संगठन को इस हत्या के लिए दोषी ठहराने से पहले पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया का पूरा होना जरूरी है। लेकिन राजनीतिक स्तर पर कांग्रेस ने इस घटना को पंजाब की सुरक्षा व्यवस्था पर हमला बताते हुए सरकार से जवाब मांगना शुरू कर दिया है।

फाजिल्का में DSP कार्यालय पर फायरिंग का मुद्दा भी उठाया

कांग्रेस ने अपने हमले में फाजिल्का की उस घटना का भी उल्लेख किया जिसमें उसके अनुसार बदमाशों ने DSP कार्यालय पर कई राउंड गोलियां चलाई थीं। पुलिस कार्यालय जैसे संवेदनशील स्थान पर फायरिंग का आरोप अपने आप में कानून-व्यवस्था की गंभीरता को लेकर सवाल पैदा करता है। कांग्रेस का तर्क है कि जब अपराधी पुलिस प्रतिष्ठानों के आसपास भी दुस्साहस दिखा रहे हों और दूसरी ओर आम नागरिकों को सार्वजनिक स्थानों पर निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आएं, तो सरकार को सिर्फ बयान देने के बजाय जमीन पर अपनी कानून-व्यवस्था की प्रभावशीलता साबित करनी होगी।

‘कानून का डर खत्म हो गया’—कांग्रेस का हमला

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पंजाब में अपराधियों के मन में न कानून का डर बचा है और न सजा का खौफ। पार्टी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली AAP सरकार के साथ-साथ अरविंद केजरीवाल पर भी राजनीतिक हमला बोला और आरोप लगाया कि पंजाब की जनता को बदलाव और बेहतर शासन के सपने दिखाए गए थे, लेकिन अब प्रदेश में अपराध को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं।

कांग्रेस ने अपने बयान में बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते हुए आरोप लगाया कि AAP नेतृत्व ने पंजाब को अपराधियों और माफिया के हवाले कर दिया है। पार्टी ने इसे राजनीतिक धोखा बताते हुए कहा कि पंजाब की जनता ऐसे हालात को स्वीकार नहीं करेगी। कांग्रेस का यह बयान साफ संकेत देता है कि वह आने वाले समय में कानून-व्यवस्था को पंजाब सरकार के खिलाफ एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में उठाने की तैयारी में है।

सरकार के सामने अब सबसे बड़ा सवाल—सड़क पर सुरक्षा कौन देगा?

अमृतसर की हत्या के बाद सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि हमलावर कौन थे और हत्या की वजह क्या थी। उससे बड़ा सवाल यह है कि सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस की मौजूदगी और अपराध रोकने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। सोशल मीडिया के दौर में सार्वजनिक रूप से सक्रिय रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी नए सवाल सामने आ रहे हैं।

कांग्रेस ने इस घटना को सरकार की कानून-व्यवस्था की परीक्षा बताते हुए हमला तेज कर दिया है। अब पुलिस जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि हत्या की पूरी साजिश क्या थी, इसके पीछे कौन लोग थे और हमलावरों तक पुलिस कितनी जल्दी पहुंचती है। एक बात साफ है—अमृतसर की यह वारदात अब सिर्फ एक हत्या का मामला नहीं रही; यह पंजाब की कानून-व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही पर एक बड़ा राजनीतिक सवाल बन चुकी है।

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