अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 4 अगस्त 2026
नेपाल के दक्षिणी हिस्सों में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच भड़की सांप्रदायिक हिंसा ने गंभीर रूप ले लिया है। 26 जुलाई को भारतीय सीमा से लगे सुनसरी जिले में एक हिंदू धार्मिक आयोजन के दौरान तेज संगीत और धार्मिक झंडों को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया और बाद में इसकी आग मधेश प्रदेश के दूसरे हिस्सों तक पहुंच गई। हिंसा में अब तक तीन लोगों की मौत हुई है और शुरुआती झड़पों में कम से कम 25 लोग घायल हुए। कई संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू लगाया गया और बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए।
मुस्लिम दुकानों, घरों और मस्जिदों को बनाया गया निशाना
हिंसा के दौरान मुस्लिम समुदाय की दुकानों, संपत्तियों और धार्मिक स्थलों पर हमलों के वीडियो सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर सामने आए हैं। वीडियो में दुकानों और संपत्तियों में आगजनी तथा लूटपाट, मस्जिद में आग और लोगों के साथ मारपीट के दृश्य दिखाई दे रहे हैं।
कुछ वीडियो में धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने और उन पर दूसरे धार्मिक प्रतीक लगाए जाने के दृश्य भी प्रसारित हुए हैं। इन घटनाओं ने हिंसा को केवल दो समूहों के बीच सड़क पर हुई झड़प से आगे बढ़ाकर धार्मिक स्थलों और अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बना दिया है।
हालांकि सोशल मीडिया पर वीडियो उपलब्ध होना अपने-आप उनकी तारीख, स्थान और पूरे संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। अलग-अलग वीडियो की प्रामाणिकता और घटनास्थल की आधिकारिक जांच महत्वपूर्ण बनी हुई है।
सिराहा में पुलिस की मौजूदगी में युवक की पिटाई का वीडियो
सिराहा जिले से सामने आए एक वीडियो में एक मुस्लिम व्यक्ति के साथ भीड़ मारपीट करती दिखाई देती है और वहां पुलिसकर्मी भी मौजूद नजर आते हैं। बाद में पुलिसकर्मी हस्तक्षेप कर हमला रोकते दिखाई देते हैं।
यह वीडियो सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। सिराहा उन जिलों में शामिल है जहां सुनसरी में शुरू हुई हिंसा के बाद तनाव फैल गया। इसी जिले में हिंसा के दौरान एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत भी हुई।
26 जुलाई को सुनसरी में भड़की थी हिंसा
घटनाक्रम की शुरुआत 26 जुलाई को सुनसरी जिले के देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका क्षेत्र के कप्तानगंज में हुई। हिंदू श्रद्धालु सावन के बोलबम अनुष्ठान के लिए पवित्र जल लेकर कोशी बैराज की ओर जा रहे थे। जुलूस के साथ तेज संगीत बज रहा था।
स्थानीय मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने तेज आवाज पर आपत्ति जताई। धार्मिक झंडों को लेकर भी विवाद हुआ। कहासुनी जल्द ही हिंसक टकराव में बदल गई और दोनों तरफ से भीड़ जमा होने लगी। लाठी, पत्थर और बांस लेकर लोग आमने-सामने आ गए।
नेपाल पुलिस और Armed Police Force को स्थिति नियंत्रित करने के लिए उतारा गया। चेतावनी और आंसू गैस के बावजूद भीड़ नहीं हटने पर गोलीबारी हुई। ओम प्रकाश मेहता की गोली लगने से मौत हो गई और कई लोग घायल हुए।
सुनसरी से सिराहा और धनुषा तक पहुंचा तनाव
सुनसरी में हुई मौत और झड़पों के बाद तनाव दूसरे क्षेत्रों में फैलने लगा। 30 जुलाई तक सिराहा के गोलबाजार और लहान में प्रदर्शन और झड़पें हुईं। सिराहा में गणेश यादव की मौत हुई। इसके बाद धनुषा और जनकपुर के आसपास भी तनाव बढ़ा और प्रशासन को कर्फ्यू तथा प्रतिबंधात्मक आदेश लगाने पड़े।
सुनसरी के हरिनगर, भुटाहा, कप्तानगंज, घुस्की और देवानगंज जैसे इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई। कई स्थानों पर बाजार बंद रहे, स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हुई और लोगों की आवाजाही सीमित करनी पड़ी।
आगजनी और लूटपाट ने बढ़ाया तनाव
हिंसा के दौरान दुकानों और दूसरी संपत्तियों को जलाने तथा लूटने की घटनाएं सामने आईं। सोशल मीडिया वीडियो में जलती हुई दुकानें, क्षतिग्रस्त संपत्तियां और हिंसक भीड़ दिखाई देती है।
सबसे गंभीर चिंता धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने को लेकर है। मस्जिद में आग के वीडियो और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने वाले दृश्य तेजी से प्रसारित हुए हैं। ऐसे दृश्य नेपाल जैसे बहुधार्मिक समाज में तनाव को और बढ़ाने की क्षमता रखते हैं।
सोशल मीडिया बना हिंसा का दूसरा मोर्चा
जमीन पर हिंसा के साथ सोशल मीडिया भी इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। सुनसरी, सिराहा और दूसरे इलाकों से हिंसा के अनेक वीडियो और तस्वीरें तेजी से प्रसारित हुईं। इनमें आगजनी, मारपीट, धार्मिक स्थलों को नुकसान और पुलिस कार्रवाई के दृश्य शामिल हैं।
इसके साथ यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि नेपाल से जुड़ी रिपोर्टों में कुछ पुराने अथवा दूसरी घटनाओं के वीडियो और तस्वीरों को मौजूदा हिंसा से जोड़कर प्रसारित किए जाने की बात सामने आई है। इसलिए सोशल मीडिया पर मौजूद सामग्री और किसी घटना की स्वतंत्र रूप से सत्यापित रिपोर्टिंग के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
तीन मौतें, दर्जनों घायल
मौजूदा हिंसा में अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है। शुरुआती घटनाओं में कम से कम 25 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई। हिंसा और विरोध प्रदर्शनों के विस्तार के साथ कई अन्य लोग भी घायल हुए।
हालात संभालने के लिए नेपाल पुलिस, Armed Police Force और सेना के जवानों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया। कर्फ्यू के कारण बाजार बंद रहे और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने दिया निष्पक्ष जांच का भरोसा
हिंसा शुरू होने के चार दिन बाद प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि गृह मंत्रालय ने उच्चस्तरीय जांच समिति बनाई है और जांच पारदर्शी तथा निष्पक्ष होगी। उन्होंने नागरिकों से अफवाहों और नफरत फैलाने वाली सामग्री से बचने तथा सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की। हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
नेपाल के लिए बड़ी परीक्षा
सुनसरी से शुरू हुई हिंसा अब नेपाल के लिए कानून-व्यवस्था से कहीं बड़ा सवाल बन चुकी है। तीन लोगों की मौत, दर्जनों घायलों, आगजनी, लूटपाट और धार्मिक स्थलों पर हमलों के बीच सबसे बड़ी चुनौती समुदायों के बीच भरोसा बहाल करने की है।
सरकार के सामने अब हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर निष्पक्ष कार्रवाई करने, प्रभावित परिवारों को न्याय देने और मंदिर-मस्जिद समेत प्रत्येक धार्मिक स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है। साथ ही सोशल मीडिया पर मौजूद हर महत्वपूर्ण वीडियो की जांच से यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि घटना कब और कहां हुई तथा उसके लिए जिम्मेदार लोग कौन थे।
नेपाल में मौजूदा संकट का समाधान किसी पूरे समुदाय को कठघरे में खड़ा करने में नहीं, बल्कि वीडियो, प्रत्यक्ष साक्ष्य, पुलिस रिकॉर्ड और जांच के आधार पर हिंसा करने वाले व्यक्तियों और समूहों की जवाबदेही तय करने में है।




