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CJP छात्र आंदोलन: ‘अवैध हिरासत’ के आरोप पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली और बिहार पुलिस से जवाब तलब की मांग

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 जुलाई 2026

NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। शीर्ष अदालत में दायर कई याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली और बिहार पुलिस ने आंदोलन से जुड़े कई लोगों को गैरकानूनी और मनमाने तरीके से हिरासत में लिया, जो संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।

याचिकाओं में दावा किया गया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को भोजन और पानी उपलब्ध कराने वाले एक स्वयंसेवक तथा उसके एक मित्र को पुलिस ने हिरासत में लिया। आरोप है कि दोनों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए, उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर उन्हें एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया और प्रदर्शन के लिए धन कहां से आया, इसे लेकर उनसे पूछताछ की गई।

एक अन्य याचिका में कहा गया है कि एक कानून के छात्र को बिना किसी गिरफ्तारी वारंट के हिरासत में लिया गया और वह अब भी बिहार पुलिस की अभिरक्षा में है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन सभी मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और संबंधित लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ।

इन आरोपों पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया। अदालत ने पुलिस को दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या जबरन कार्रवाई तब तक नहीं की जाएगी, जब तक उनके खिलाफ कोई आपराधिक पृष्ठभूमि या गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आता।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को छात्र आंदोलन और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने एक ओर पुलिस जांच में हस्तक्षेप नहीं किया, वहीं दूसरी ओर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के अधिकारों की रक्षा पर भी जोर दिया।

गौरतलब है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक के विरोध को लेकर हाल के दिनों में जंतर-मंतर पर व्यापक छात्र आंदोलन हुआ था। इसी आंदोलन के दौरान कई प्रदर्शनकारियों और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिनकी जांच अभी जारी है।

अब इस मामले की अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट इन आरोपों और पुलिस कार्रवाई की वैधानिकता पर विस्तार से विचार करेगा। इस बीच अदालत का अंतरिम आदेश छात्रों के अधिकारों और पुलिस जांच के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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