राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 अक्टूबर 2026
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी संघर्ष तेज हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली INDIA गठबंधन की महारैली को खुला समर्थन देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई है। CJP ने साफ कहा है कि लोकतंत्र में किसी भी पात्र नागरिक को उसके मताधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। मतदाता सूची में नाम शामिल करने की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें गरीब, कमजोर और आम नागरिक को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और किसी की लोकतांत्रिक भागीदारी बाधित न हो।
मतदाता सूची से नाम छूटे तो लोकतंत्र कैसे बचेगा?
CJP ने अपने बयान में संविधान के मूल सिद्धांतों और डॉ. भीमराव आंबेडकर की लोकतांत्रिक विरासत का हवाला देते हुए कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत समान राजनीतिक प्रतिनिधित्व और हर पात्र नागरिक के वोट के अधिकार में है। SIR की प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम छूटने की आशंका ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह मतदाता सूची को पारदर्शी बनाए, हर शिकायत का समयबद्ध निपटारा करे और यह सुनिश्चित करे कि कोई पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज
CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए चुनाव आयोग की जवाबदेही का सवाल उठाया है। लोकतंत्र में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सर्वोपरि है। जब मतदाता सूची को लेकर सवाल उठते हैं, तो आयोग को स्पष्ट जवाब देना चाहिए और ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, जिससे मतदाताओं का भरोसा कायम रहे। केवल प्रक्रिया का हवाला देना पर्याप्त नहीं है; जरूरी है कि हर पात्र मतदाता का नाम सूची में हो और सुधार के लिए प्रभावी व्यवस्था मौजूद रहे।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में विपक्ष की बड़ी हुंकार
INDIA गठबंधन की 1 नवंबर की महारैली में SIR, मतदाता सूची की पारदर्शिता और वोट के अधिकार का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा। CJP का समर्थन इस अभियान को अतिरिक्त राजनीतिक बल देता है। यह लड़ाई केवल राजनीतिक दलों के बीच की नहीं, बल्कि हर उस नागरिक के अधिकार से जुड़ी है, जो अपने वोट के जरिए सरकार चुनने में भागीदारी चाहता है।
वोट का अधिकार किसी की मेहरबानी नहीं, संवैधानिक हक है
लोकतंत्र में वोट केवल एक बटन दबाने का नाम नहीं, बल्कि नागरिक की राजनीतिक आवाज है। मतदाता सूची में किसी पात्र नागरिक का नाम छूटना उसकी भागीदारी को सीधे प्रभावित कर सकता है। इसलिए चुनाव आयोग को पुनरीक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी बनाने, नामों की जांच के स्पष्ट मानक सार्वजनिक करने, आवेदन प्रक्रिया सरल करने और शिकायतों का समय पर निपटारा सुनिश्चित करने की जरूरत है।
1 नवंबर की रैली में उठने वाला सबसे बड़ा सवाल यही होगा—क्या हर पात्र नागरिक का वोट सुरक्षित है और क्या चुनाव आयोग इस भरोसे को मजबूत करने के लिए पूरी जवाबदेही निभा रहा है? CJP ने INDIA गठबंधन के साथ खड़े होकर इस मुद्दे को और धार दी है। अब चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह सवालों का स्पष्ट जवाब दे और लोकतंत्र में मतदाता के अधिकार की रक्षा करके दिखाए।



