अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 4 अगस्त 2026
चीन की व्यापक निगरानी व्यवस्था को लेकर एक नया मामला सामने आया है। एक साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर को ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मिला, जिसमें चीन में रहने वाले सैकड़ों विदेशियों से जुड़ी बेहद विस्तृत निजी जानकारियां कथित तौर पर दर्ज थीं। इनमें पासपोर्ट नंबर और मोबाइल नंबर से लेकर यात्रा, अस्पताल जाने, गैस बिल और ट्रेन या विमान में सफर तक की जानकारी शामिल थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व विदेशी संवाददाता और साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर मार्क होफर ने इस साल की शुरुआत में एक वेबसाइट खोजी, जिसका नाम ‘Dynamic Control Platform for Overseas Personnel’ था। वेबसाइट खोलने पर उन्हें अपनी तस्वीर, पासपोर्ट नंबर और चीन में पहले इस्तेमाल किया गया मोबाइल नंबर तक दिखाई दिया।
प्लेटफॉर्म पर उत्तरी चीन के झांगजियाकौ शहर में रहने वाले 700 से अधिक विदेशियों से संबंधित करीब 12,000 एंट्री मौजूद होने की बात कही गई है। इनमें विदेशी नागरिकों के अलावा हांगकांग और ताइवान से जुड़े लोगों तथा 300 से अधिक विदेशी पत्रकारों के रिकॉर्ड भी शामिल बताए गए। इनमें कुछ ऐसे पत्रकार भी थे जो कथित तौर पर कभी झांगजियाकौ गए ही नहीं थे।
डेटाबेस में लोगों की गतिविधियों का बेहद बारीक रिकॉर्ड दिखाई देने का दावा किया गया है—वे कहां जाते हैं, कब अस्पताल पहुंचे, गैस के लिए कितना भुगतान किया और किस फ्लाइट या ट्रेन में किस सीट पर यात्रा की। इससे संकेत मिलता है कि अलग-अलग स्रोतों से जुटाई गई सूचनाओं को एक ही निगरानी प्रणाली में जोड़ा जा रहा था।
रिपोर्ट में इस प्लेटफॉर्म के तार बीजिंग की Origin Dynamic नाम की कंपनी से जुड़े होने की बात कही गई है। कंपनी पुलिस विभागों के लिए रोबोटिक्स और निगरानी उपकरण उपलब्ध कराती है। 2023 में कंपनी ने गैर-चीनी नागरिकों से संबंधित लगभग इसी तरह की प्रणाली के लिए पेटेंट भी दाखिल किया था।
डेटाबेस में भारतीय और पाकिस्तानी छात्रों से जुड़ी जानकारियां भी होने का दावा है। झांगजियाकौ की Hebei North University में पढ़ने वाले कई विदेशी छात्रों की फाइलों में कथित तौर पर उनकी पढ़ाई, वैवाहिक स्थिति और धर्म जैसी निजी जानकारियों के साथ यह भी दर्ज था कि कैमरों ने उन्हें कैंपस में कब प्रवेश करते देखा।
प्लेटफॉर्म ने कुछ देशों के नागरिकों को अलग-अलग श्रेणियों में भी बांटा था। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के लोगों को ‘Five Eyes Alliance’ की श्रेणी में रखा गया था। वहीं भारत का उल्लेख विदेशी छात्रों के संदर्भ में सामने आया।
सबसे गंभीर सवाल डेटा की सुरक्षा को लेकर भी है। रिपोर्ट के अनुसार, वेबसाइट के लॉगिन पेज पर यूजरनेम और पासवर्ड पहले से भरे हुए थे, जिससे संवेदनशील निजी जानकारियों वाला डेटाबेस बेहद कमजोर सुरक्षा के साथ ऑनलाइन उपलब्ध था। जनवरी में इसकी जानकारी मिलने के बाद रिसर्चर ने डेटा सुरक्षित किया, जबकि मई तक वेबसाइट गायब हो गई।
हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि चीनी पुलिस ने इस डेटाबेस का वास्तविक रूप से किस स्तर तक इस्तेमाल किया। फिर भी सामने आई जानकारियां चीन में रहने वाले विदेशी नागरिकों की निजता, डेटा सुरक्षा और सरकारी निगरानी की सीमा को लेकर नए और गंभीर सवाल खड़े करती हैं।




