अंतरराष्ट्रीय डेस्क 16 दिसंबर 2025
बीजिंग/रियाद—वैश्विक कूटनीति के बदलते समीकरणों के बीच चीन और सऊदी अरब ने अपने रिश्तों को एक नया आयाम देने की दिशा में अहम कदम उठाया है। दोनों देशों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर समन्वय और सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है। यह सहमति चीन के विदेश मंत्री वांग यी और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के बीच हुई उच्च-स्तरीय बैठक के बाद सामने आई है। इस बातचीत को मध्य-पूर्व और वैश्विक राजनीति के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयानों में कहा गया कि चीन और सऊदी अरब केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक शांति और बहुपक्षीय मंचों पर साझा रुख अपनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। दोनों पक्षों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में संवाद, संतुलन और सहयोग पहले से कहीं अधिक ज़रूरी हो गया है। इसी सोच के तहत दोनों देश संयुक्त राष्ट्र, G20 और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी समन्वय बढ़ाने को तैयार हैं।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सऊदी अरब को मध्य-पूर्व का एक प्रमुख और विश्वसनीय साझेदार बताते हुए कहा कि बीजिंग रियाद के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक रिश्तों को और गहराई देना चाहता है। उन्होंने कहा कि चीन हमेशा से क्षेत्रीय देशों की संप्रभुता, स्थिरता और विकास के अधिकार का समर्थन करता आया है और आगे भी इसी नीति पर कायम रहेगा। वांग यी ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में उच्च-स्तरीय यात्राओं और संयुक्त पहलों के ज़रिये सहयोग को और ठोस रूप दिया जाएगा।
वहीं सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने चीन को वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार शक्ति बताते हुए कहा कि सऊदी अरब, चीन के साथ अपने रिश्तों को केवल ऊर्जा और व्यापार तक सीमित नहीं देखता। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास, आर्थिक साझेदारी और सुरक्षा सहयोग लगातार मज़बूत हो रहा है। सऊदी अरब का मानना है कि चीन के साथ बढ़ता तालमेल न केवल द्विपक्षीय हितों को साधेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता को भी बढ़ावा देगा।
इस बातचीत में मध्य-पूर्व की मौजूदा स्थिति, क्षेत्रीय संघर्षों, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकासशील देशों की भूमिका जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने फिलिस्तीन मुद्दे पर भी न्यायपूर्ण और टिकाऊ समाधान की आवश्यकता पर बल दिया और संवाद के ज़रिये संकटों के समाधान की वकालत की। यह रुख उस समय सामने आया है जब मध्य-पूर्व लगातार भू-राजनीतिक तनावों का सामना कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन-सऊदी अरब का यह बढ़ता तालमेल वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत देता है। जहां एक ओर अमेरिका-केंद्रित व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं चीन खाड़ी देशों के साथ अपने संबंधों को तेज़ी से मज़बूत कर रहा है। सऊदी अरब भी अपनी ‘विजन 2030’ नीति के तहत बहुपक्षीय विदेश नीति को आगे बढ़ा रहा है, जिसमें चीन एक अहम साझेदार के रूप में उभर कर सामने आया है।
कुल मिलाकर, चीन और सऊदी अरब के बीच बढ़ता यह रणनीतिक और कूटनीतिक समन्वय आने वाले समय में मध्य-पूर्व की राजनीति, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शक्ति समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। यह साझेदारी सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं, बल्कि एक बदलती वैश्विक व्यवस्था की ओर इशारा करती है, जहां नए गठजोड़ और नए केंद्र उभर रहे हैं।




