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छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड प्रमुख की अपील: मुस्लिम युवाओं को गरबा पंडालों से दूरी बनाए रखने की नसीहत

रायपुर 23 सितंबर 2025

छत्तीसगढ़ में नवरात्रि उत्सव के दौरान वक्फ बोर्ड प्रमुख का एक बयान सामने आया है जिसने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने मुस्लिम युवाओं से अपील करते हुए कहा है कि वे गरबा पंडालों से दूरी बनाए रखें। उनके मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में इन आयोजनों के दौरान कई बार विवाद और टकराव की स्थिति देखने को मिली है, और अक्सर गलतफहमियों के चलते धार्मिक तनाव बढ़ता है। इसीलिए, उन्होंने सलाह दी है कि मुस्लिम युवा खुद को इन जगहों से दूर रखकर समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखने में मदद करें।

इस अपील को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भाजपा नेताओं ने इस बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह समाज को बांटने वाला बयान है और इससे सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा मिलेगा। उनका आरोप है कि ऐसे बयान त्योहारों की पवित्रता और सामाजिक एकता को चोट पहुंचाते हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं ने अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाते हुए कहा कि यह वक्फ बोर्ड प्रमुख का व्यक्तिगत विचार हो सकता है, लेकिन इसे पूरे मुस्लिम समाज का दृष्टिकोण मानना उचित नहीं होगा। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ जैसे बहु-धार्मिक और बहु-सांस्कृतिक राज्य में हर समुदाय को स्वतंत्रता है कि वह किस आयोजन में शामिल हो या न हो।

मुस्लिम समाज के भीतर भी इस बयान को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है। कुछ लोग इसे एक व्यावहारिक सुझाव मानते हैं ताकि युवा अनावश्यक विवादों में न फँसें और किसी भी प्रकार की साम्प्रदायिक झड़प से बचे रहें। उनका मानना है कि इस नसीहत का मकसद धार्मिक कट्टरता नहीं बल्कि शांति बनाए रखना है। वहीं दूसरी ओर, समाज का एक बड़ा हिस्सा मानता है कि इस तरह की अपीलें अनजाने में ही समाज में दूरी और अविश्वास को बढ़ाती हैं। उनका तर्क है कि भारतीय संस्कृति में विविधता ही सबसे बड़ी ताकत है और ऐसे संदेश उस साझा संस्कृति की भावना को कमजोर करते हैं।

गरबा पंडालों का आयोजन करने वाले आयोजकों ने इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पंडाल हमेशा से सभी धर्मों और समुदायों के लिए खुले रहे हैं। उनका कहना है कि गरबा एक सांस्कृतिक आयोजन है, धार्मिक संकीर्णता नहीं। आयोजकों का दावा है कि वे किसी को भी बाहर करने या रोकने में विश्वास नहीं करते और उनका उद्देश्य समाज के हर वर्ग को जोड़ना है। कई आयोजकों ने यह भी कहा कि इस तरह के बयानों से अनावश्यक तनाव पैदा होता है जबकि सच्चाई यह है कि गरबा का मंच हमेशा भाईचारे और एकता का प्रतीक रहा है।

इस पूरे विवाद ने नवरात्रि जैसे सांस्कृतिक पर्व पर अनावश्यक तनाव और राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में राज्य सरकार और सामाजिक संगठन इस पर क्या रुख अपनाते हैं। एक ओर जहां वक्फ बोर्ड प्रमुख इसे शांति बनाए रखने की अपील बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे समाज को बांटने की कोशिश मान रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या इस तरह की अपील वास्तव में सौहार्द को सुरक्षित रख पाएगी या फिर समाज में और अधिक दूरी पैदा कर देगी।

 

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