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कावेरी जल विवाद फिर गरमाया: कर्नाटक CM डीके शिवकुमार की 13 अगस्त का बंद वापस लेने की अपील

तमिलनाडु को कावेरी का पानी छोड़े जाने के विरोध में विपक्ष, किसान और कन्नड़ संगठनों ने दिया है बंद का आह्वान; शिवकुमार बोले—सुप्रीम कोर्ट में DMK की याचिका समेत हर पहलू पर सरकार की नजर

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 2 अगस्त 2026

कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी नदी के पानी को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। तमिलनाडु को पानी छोड़े जाने के विरोध में 13 अगस्त को प्रस्तावित बंद के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने विपक्षी दलों, किसान संगठनों और कन्नड़ संगठनों से बंद का आह्वान वापस लेने की अपील की है।

‘सरकार हालात पर बारीकी से नजर रख रही है’

बेंगलुरु में कावेरी जल विवाद को लेकर हुई सर्वदलीय बैठक के बाद मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार पूरे मामले का सावधानी से आकलन कर रही है। सरकार तमिलनाडु से जुड़े कानूनी घटनाक्रम और सुप्रीम कोर्ट में DMK की याचिका समेत सभी पहलुओं पर नजर बनाए हुए है। इसी आधार पर उन्होंने प्रदर्शनकारियों से 13 अगस्त के प्रस्तावित बंद पर दोबारा विचार करने की अपील की।

तमिलनाडु को पानी छोड़ने के खिलाफ बढ़ रहा विरोध

कर्नाटक में किसान और कई कन्नड़ संगठन तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़े जाने का विरोध कर रहे हैं। पानी का मुद्दा दोनों राज्यों में लंबे समय से राजनीतिक और भावनात्मक रूप से बेहद संवेदनशील रहा है। कर्नाटक के किसान अपनी जरूरतों और जल उपलब्धता का सवाल उठा रहे हैं, जबकि तमिलनाडु भी अपने हिस्से के पानी की मांग करता रहा है।

सर्वदलीय बैठक में हुई हालात की समीक्षा

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में कावेरी की मौजूदा स्थिति और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया समेत विभिन्न राजनीतिक पक्षों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सरकार की कोशिश है कि आंदोलन और बंद की स्थिति बनने से पहले राजनीतिक तथा सामाजिक संगठनों के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए।

अब 13 अगस्त पर नजर

मुख्यमंत्री की अपील के बाद अब निगाह इस बात पर रहेगी कि बंद का आह्वान करने वाले विपक्षी दल, किसान और कन्नड़ संगठन अपना फैसला बदलते हैं या आंदोलन जारी रखते हैं। अगर बंद वापस नहीं लिया जाता है तो आने वाले दिनों में कावेरी विवाद कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मुद्दा बन सकता है।

कावेरी का सवाल केवल दो राज्यों के बीच पानी बांटने का विवाद नहीं है। इसके साथ किसानों की खेती, पेयजल की जरूरत, राज्यों के अधिकार और अदालत के निर्देश भी जुड़े हैं। यही कारण है कि कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच पानी का यह विवाद बार-बार राजनीतिक और कानूनी टकराव का रूप लेता रहा है।

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