
स्टूडियो से दरबार तक गोद में बैठा एंकर : ‘राष्ट्र’ की ठेकेदारी और सत्ता का दलाल स्वामी
अजय कुमार | नई दिल्ली 7 जनवरी 2026 यह पत्रकारिता नहीं है—यह दरबारी उद्घोषणा है। यह बहस नहीं—यह फैसले की डिक्री (Conclusive Determination) है। यह सवाल नहीं—यह लेबल चिपकाने की फैक्ट्री है। अर्नब गोस्वामी एक बार फिर उसी पुराने अवतार में लौट आए हैं, जहाँ कैमरा चलता है, आवाज़ चढ़ती है, ग्राफिक्स गरजते हैं और









