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हिंदुजा परिवार पर नौकरों के शोषण का मामला: कम वेतन, 18 घंटे काम और पासपोर्ट जब्त करने के आरोप में सजा

दुनिया | ABC NATIONAL NEWS | लंदन | 26 जून 2026

ब्रिटेन के उद्योगपति हिंदुजा परिवार एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। स्विट्जरलैंड की अदालत ने घरेलू कर्मचारियों के कथित शोषण से जुड़े मामले में परिवार के चार सदस्यों—प्रकाश हिंदुजा, कमल हिंदुजा, अजय हिंदुजा और नम्रता हिंदुजा—को श्रम कानूनों के उल्लंघन का दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। यह मामला दुनिया भर में प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों और अमीर परिवारों की जवाबदेही पर नई बहस छेड़ रहा है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, हिंदुजा परिवार ने भारत से लाए गए घरेलू कर्मचारियों से अत्यधिक कठिन परिस्थितियों में काम कराया। आरोप है कि कर्मचारियों से प्रतिदिन लगभग 18 घंटे तक काम लिया जाता था, लेकिन उन्हें स्विट्जरलैंड के श्रम कानूनों के अनुरूप वेतन नहीं दिया गया। बताया गया कि कर्मचारियों को स्थानीय मुद्रा के बजाय भारतीय रुपये में भुगतान किया जाता था, जो स्विस मानकों की तुलना में बेहद कम था।

जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि कर्मचारियों के पासपोर्ट जब्त कर लिए गए थे, जिससे उनकी स्वतंत्र आवाजाही पर रोक लग गई थी। अभियोजन के मुताबिक, कर्मचारियों को बाहर जाने की अनुमति भी सीमित थी और वे पूरी तरह नियोक्ताओं पर निर्भर रहने को मजबूर थे।

अदालत ने श्रम कानूनों और कर्मचारियों के अधिकारों के उल्लंघन से जुड़े आरोपों को गंभीर मानते हुए फैसला सुनाया। हालांकि, मानव तस्करी (Human Trafficking) के अधिक गंभीर आरोपों में अदालत का निष्कर्ष अलग रहा और उन आरोपों पर दोषसिद्धि नहीं हुई।

हिंदुजा परिवार ने सभी आरोपों से इनकार किया है। परिवार के वकीलों का कहना है कि वे अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे और उन्हें विश्वास है कि अपील में न्याय मिलेगा।

यह मामला केवल एक कारोबारी परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में घरेलू कामगारों, विशेषकर प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर देशों से आने वाले श्रमिक अक्सर विकसित देशों में शोषण का शिकार हो जाते हैं और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त निगरानी तथा प्रभावी कानूनी व्यवस्था आवश्यक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि चाहे कोई कितना भी प्रभावशाली या संपन्न क्यों न हो, श्रम कानूनों और कर्मचारियों के अधिकारों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई से बचना आसान नहीं होगा।

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