खेल | ओपिनियन | ABC NATIONAL NEWS | 31 जुलाई 2026
“कैप नंबर 278… साइनिंग ऑफ…” विदाई संदेश के आखिर में जब अजिंक्य रहाणे ने ये चार शब्द कहे, तो उनकी आवाज़ भर्रा गई। कुछ पल के लिए शब्द जैसे गले में अटक गए। आंखों में नमी थी और चेहरे पर वही सादगी, जिसने उन्हें हमेशा बाकी सितारों से अलग बनाया। भारतीय क्रिकेट का यह शांत योद्धा बिना किसी शोर-शराबे के मैदान से विदा हो रहा था। जिसने करोड़ों भारतीयों को यादगार जीतें दीं, वह अपनी विदाई पर भावुक था, लेकिन शिकायत फिर भी उसके शब्दों में नहीं थी।
रहाणे ने अपने संदेश में कहा, “ज़िंदगी की सच्चाई यही है कि हर शुरुआत का एक अंत होता है। अब आगे बढ़ने का समय है।” उन्होंने बचपन के उस लड़के को याद किया, जो डोंबिवली से मुंबई लोकल ट्रेन में सफर कर सिर्फ एक सपना देखता था—भारत की कैप पहनने का। वह सपना पूरा हुआ, लेकिन विदाई के वक्त सबसे ज्यादा भावुक कर देने वाली बात उन्होंने आखिर में कही—
“Ajinkya means unbeatable… लेकिन क्रिकेट ने मुझे कई बार हराया। एक जगह मैं कभी नहीं हारा… और वो था आपके दिलों में।”
यही अजिंक्य रहाणे की असली कहानी है।
36 रन पर बिखरी टीम को जिसने फिर जीतना सिखाया
दिसंबर 2020… एडिलेड टेस्ट में भारत सिर्फ 36 रन पर ऑलआउट हो गया। कप्तान विराट कोहली स्वदेश लौट चुके थे। पूरी दुनिया मान बैठी थी कि अब ऑस्ट्रेलिया भारत का सफाया कर देगा।
लेकिन यहीं से अजिंक्य रहाणे ने कप्तानी संभाली। मेलबर्न में शानदार 112 रन की कप्तानी पारी खेली और भारत को जीत दिलाई। इसके बाद चोटों से जूझ रही युवा टीम के साथ उन्होंने ब्रिस्बेन में ऑस्ट्रेलिया का 32 साल पुराना अजेय रिकॉर्ड तोड़ते हुए 2-1 से ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत ली। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में यह जीत हमेशा स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज रहेगी।
विदेशी जमीन पर भरोसे का दूसरा नाम
रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। उनके नाम 8,413 अंतरराष्ट्रीय रन, 5,077 टेस्ट रन और 12 टेस्ट शतक दर्ज हैं।
लेकिन उनका असली परिचय आंकड़े नहीं, बल्कि परिस्थितियां हैं। लॉर्ड्स का शतक, मेलबर्न का शतक, वेलिंगटन, जोहानिसबर्ग, कोलंबो और वेस्टइंडीज की यादगार पारियां—जब भी भारत विदेश में मुश्किल में होता था, रहाणे अक्सर सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज बनकर सामने आते थे।
2023 के विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में भी भारत की ओर से सबसे ज्यादा रन उन्होंने ही बनाए थे। आईपीएल 2023 में चेन्नई सुपर किंग्स को चैंपियन बनाने में भी उनका अहम योगदान रहा। उन्होंने खुद को सिर्फ टेस्ट बल्लेबाज तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समय के साथ अपने खेल को भी बदला।
क्या उनके साथ पूरा इंसाफ हुआ? यही सवाल उनके संन्यास के बाद सबसे ज्यादा पूछा जाएगा।
कई क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि रहाणे को उतने मौके नहीं मिले, जितने उनके योगदान के आधार पर मिलने चाहिए थे। खराब दौर हर बड़े खिलाड़ी के करियर में आता है, लेकिन रहाणे की वापसी के रास्ते जल्दी बंद कर दिए गए। जबकि उन्होंने घरेलू क्रिकेट, आईपीएल और विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में खुद को बार-बार साबित किया।
इसके बावजूद उन्होंने कभी सार्वजनिक शिकायत नहीं की। उनका एक वाक्य आज भी उनकी पूरी शख्सियत बयान करता है—”मेरी पीआर मेरी क्रिकेट है।”
शोर नहीं, संस्कार छोड़ गए रहाणे
आज के दौर में, जब सोशल मीडिया और प्रचार कई बार प्रदर्शन से बड़ा दिखाई देता है, अजिंक्य रहाणे ने हमेशा अपने बल्ले को ही अपनी आवाज़ बनाया। न विवाद, न बयानबाजी, न सुर्खियों की दौड़। मैदान पर जिम्मेदारी और मैदान के बाहर विनम्रता—यही उनकी पहचान रही।
विदा, कैप नंबर 278…
क्रिकेट इतिहास शायद उन्हें सबसे बड़े सितारों की कतार में न रखे, लेकिन भारतीय क्रिकेट उन्हें उस खिलाड़ी के रूप में हमेशा याद रखेगा जिसने टीम के सबसे कठिन दौर में सबसे बड़ी जिम्मेदारी उठाई।
उनकी विदाई का सबसे मार्मिक दृश्य शायद हमेशा याद रहेगा—भर्राई आवाज़, नम आंखें और सिर्फ चार शब्द… “कैप नंबर 278… साइनिंग ऑफ।”
कुछ खिलाड़ी तालियों के शोर के बीच विदा होते हैं, कुछ इतिहास के पन्नों में अमर हो जाते हैं। अजिंक्य रहाणे दूसरी श्रेणी के खिलाड़ी हैं। हो सकता है चयनकर्ताओं ने उन्हें वह विदाई न दी हो जिसके वह हकदार थे, लेकिन भारतीय क्रिकेट का इतिहास उन्हें हमेशा मेलबर्न के नायक, लॉर्ड्स के शतकवीर और संकट में टीम का सबसे भरोसेमंद साथी कहकर याद रखेगा।




