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BJP से दूरी बढ़ा रही BJD, INDIA ब्लॉक के मार्च में उतरी नवीन पटनायक की पार्टी

राष्ट्रीय/राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 अक्टूबर

ओडिशा की राजनीति में लंबे समय तक BJP और कांग्रेस दोनों से समान दूरी बनाए रखने वाली बीजू जनता दल (BJD) ने अब राष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत दिया है। मंगलवार को BJD ने INDIA ब्लॉक के उस विरोध मार्च में हिस्सा लिया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सवाल उठाए गए। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि BJD अब तक खुद को BJP और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे से अलग रखते हुए अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और ‘समान दूरी’ की नीति पर चलती रही है। हालांकि पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह INDIA ब्लॉक का हिस्सा नहीं बनी है, लेकिन उसके सांसदों का विपक्षी दलों के साथ सड़क पर उतरना बदलते राजनीतिक समीकरणों का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

BJD प्रमुख और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पहले ही CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया पर पुनर्विचार की मांग कर चुके हैं। मंगलवार को उन्होंने राज्यसभा में पार्टी के सांसदों को विपक्ष के प्रदर्शन में शामिल होने का निर्देश दिया। इसके बाद BJD सांसद INDIA ब्लॉक के नेताओं के साथ संसद से निर्वाचन आयोग की ओर निकले मार्च का हिस्सा बने। राजनीतिक रूप से देखा जाए तो यह सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का फैसला नहीं है, बल्कि उस नीति से हटने का संकेत है जिसके तहत नवीन पटनायक लंबे समय से BJP और कांग्रेस दोनों से बराबर दूरी बनाकर चलते रहे हैं। ऐसे समय में जब SIR और चुनाव आयोग की भूमिका विपक्ष के बड़े राजनीतिक मुद्दे बन चुके हैं, BJD का विपक्ष के साथ खड़ा होना BJP के लिए निश्चित तौर पर एक असहज राजनीतिक संदेश है।

BJD और BJP के रिश्तों में पिछले कुछ समय से लगातार खटास बढ़ी है। दोनों दलों के बीच कभी बेहद करीबी राजनीतिक संबंध रहे हैं और संसद में कई मौकों पर BJD ने सरकार के महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत प्रस्तावों का समर्थन भी किया था। लेकिन 2024 के लोकसभा और ओडिशा विधानसभा चुनावों के बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले। ओडिशा में BJP ने सत्ता हासिल कर BJD के लंबे शासन का अंत किया और इसके बाद दोनों दलों के बीच पहले जैसी राजनीतिक नजदीकी दिखाई नहीं दी। नवीन पटनायक की पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर खुद को विपक्षी गठबंधन का हिस्सा घोषित नहीं किया, लेकिन केंद्र सरकार और BJP से जुड़े कई मुद्दों पर उसका रुख पहले की तुलना में अधिक आलोचनात्मक होता गया। अब CEC और SIR के मुद्दे पर विपक्ष के साथ सार्वजनिक रूप से खड़ा होना इसी बदलते रिश्ते की सबसे स्पष्ट तस्वीर माना जा रहा है।

दिल्ली के प्रदर्शन में BJD की मौजूदगी इसलिए भी अहम है क्योंकि यह मुद्दा केवल कांग्रेस या INDIA ब्लॉक तक सीमित नहीं रह गया है। विपक्षी दल SIR को लेकर मतदाता सूची, नामों के हटाए जाने, Form-6 और Form-7 तथा चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग इन आरोपों को लेकर अपने पक्ष और स्पष्टीकरण सामने रख रहा है। इसी राजनीतिक टकराव के बीच BJD का CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन में शामिल होना बताता है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर नवीन पटनायक अपनी पार्टी को एक अलग राजनीतिक स्थिति में खड़ा करना चाहते हैं।

यह घटनाक्रम BJP के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि BJD ने अभी तक कांग्रेस के साथ औपचारिक राजनीतिक गठजोड़ नहीं किया है और न ही खुद को INDIA ब्लॉक का हिस्सा घोषित किया है। बावजूद इसके, जिस मुद्दे पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दल BJP और चुनाव आयोग के खिलाफ एकजुट होकर सड़क पर उतर रहे हैं, उसी मुद्दे पर BJD का उनके साथ खड़ा होना विपक्षी खेमे के राजनीतिक दायरे को बढ़ाता है। यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि BJD पूरी तरह BJP विरोधी मोर्चे में शामिल हो गई है, लेकिन इतना जरूर है कि नवीन पटनायक की पुरानी ‘दोनों से समान दूरी’ वाली राजनीति अब पहले जैसी दिखाई नहीं दे रही है।

मंगलवार के घटनाक्रम का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि BJD का यह फैसला ऐसे समय आया है जब दिल्ली में विपक्षी सांसदों और पुलिस के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। INDIA ब्लॉक के सांसद संसद से निर्वाचन आयोग की ओर मार्च कर रहे थे, लेकिन भारी पुलिस बैरिकेडिंग के कारण उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव और कई अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। इसके बाद आकाशवाणी भवन परिसर में भी विपक्षी सांसदों ने धरना दिया। इसी व्यापक राजनीतिक आंदोलन के बीच BJD सांसदों की मौजूदगी ने प्रदर्शन को एक और राजनीतिक आयाम दे दिया।

नवीन पटनायक की राजनीति को समझने वालों के लिए यह बदलाव मामूली घटना नहीं है। BJD ने वर्षों तक केंद्र की सत्ता और विपक्ष के बीच अपनी अलग जगह बनाए रखी। जरूरत के मुताबिक मुद्दों पर समर्थन या विरोध किया, लेकिन किसी एक खेमे में पूरी तरह शामिल होने से बचती रही। अब जब पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के सांसद विपक्षी दलों के साथ CEC के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं और नवीन पटनायक स्वयं SIR पर सवाल उठा चुके हैं, तो यह संकेत साफ है कि BJD अपने राजनीतिक विकल्पों को नए सिरे से देख रही है। ओडिशा में BJP के सत्ता में आने के बाद BJD के सामने अपनी राजनीतिक जमीन बचाए रखने की चुनौती भी है और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की जरूरत भी।

फिलहाल BJD ने INDIA ब्लॉक में शामिल होने से इनकार किया है, लेकिन राजनीति में केवल औपचारिक गठबंधन ही संदेश नहीं देते। कई बार किसी मुद्दे पर किसके साथ खड़ा हुआ जाता है, वही सबसे बड़ा राजनीतिक संकेत होता है। CEC ज्ञानेश कुमार और SIR के मुद्दे पर BJP से अलग होकर विपक्षी मार्च में शामिल होना नवीन पटनायक की पार्टी की बदली हुई राजनीतिक दिशा का ऐसा ही संकेत है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि BJD इसी रुख को दूसरे राष्ट्रीय मुद्दों पर भी जारी रखती है या यह केवल SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे तक सीमित रहता है।

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