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महिला आरक्षण पर दबाव बनाने की कोशिश : पीएम को चिट्ठी लिखकर विपक्ष करेगा परिसीमन के बिना तुरंत लागू करने की मांग

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राष्ट्रीय राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 19 अप्रैल 2026

महिला आरक्षण के मुद्दे पर संसद में हालिया घटनाक्रम के बाद विपक्षी दल अब सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर सक्रिय हो गए हैं। इसी कड़ी में कई प्रमुख विपक्षी दल प्रधानमंत्री को संयुक्त पत्र लिखने की तैयारी कर रहे हैं। प्रस्तावित पत्र में यह मांग उठाई जाएगी कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण बिना किसी देरी के तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए और इसे परिसीमन (डिलिमिटेशन) तथा जनगणना जैसी प्रक्रियाओं से अलग रखा जाए। सूत्रों के अनुसार, विपक्ष द्वारा भेजे जाने वाले इस पत्र में यह रेखांकित किया जाएगा कि संसद द्वारा पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करने में अनावश्यक देरी हो रही है। विपक्ष का मानना है कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का निर्णय पहले ही लिया जा चुका है, ऐसे में इसे तकनीकी और प्रशासनिक शर्तों से जोड़ना इसके क्रियान्वयन को टालने जैसा है। इसी आधार पर विपक्ष प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करेगा।

विपक्षी नेताओं का तर्क है कि मौजूदा लोकसभा और विधानसभाओं की वर्तमान सीटों में ही महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू किया जा सकता है और इसके लिए परिसीमन का इंतजार करना आवश्यक नहीं है। उनका कहना है कि यदि सरकार महिला सशक्तिकरण को लेकर गंभीर है तो उसे तत्काल निर्णय लेना चाहिए।

गौरतलब है कि वर्ष 2023 में पारित संवैधानिक संशोधन के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था। हालांकि, इसके लागू होने को जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ दिया गया, जो अब विवाद का मुख्य कारण बन गया है। विपक्ष का आरोप है कि यही शर्त इस कानून के क्रियान्वयन में सबसे बड़ी बाधा बन रही है।

हाल ही में संसद में महिला आरक्षण को जल्द लागू करने के उद्देश्य से एक नया संशोधन विधेयक लाया गया था, लेकिन यह आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका और गिर गया। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने इसे ऐसे ढांचे में पेश किया जिससे इसका पारित होना मुश्किल हो जाए, जबकि जरूरत महिलाओं को तत्काल प्रतिनिधित्व देने की थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिसीमन को लेकर देश में पहले से ही मतभेद मौजूद हैं। विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों में यह आशंका जताई जा रही है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से उनका प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। ऐसे में महिला आरक्षण को इस प्रक्रिया से जोड़ने से विवाद और गहरा हो गया है।

वहीं, सरकार का पक्ष है कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन आवश्यक है, ताकि सीटों का पुनर्गठन कर संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके। सरकार का यह भी तर्क है कि परिसीमन के बाद लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर महिलाओं को अधिक अवसर दिए जा सकते हैं।

फिलहाल, विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री को पत्र लिखे जाने की तैयारी ने सियासी हलचल तेज कर दी है। यदि विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट होकर दबाव बनाता है, तो आने वाले समय में सरकार को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार विपक्ष की इस प्रस्तावित पहल पर क्या रुख अपनाती है और क्या महिलाओं को उनका बहुप्रतीक्षित राजनीतिक प्रतिनिधित्व जल्द मिल पाता है या नहीं।

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