राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 जुलाई 2026
देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा लाया गया एंटी-पेपर लीक (संशोधन) विधेयक बुधवार को लोकसभा से पारित हो गया। विपक्षी दलों के हंगामे और नारेबाजी के बीच सदन ने विधेयक को मंजूरी दे दी। संशोधित कानून के तहत अब पेपर लीक जैसे गंभीर अपराधों में दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा और ₹50 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने और युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने NEET पेपर लीक मामले में त्वरित कार्रवाई की और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए।
जितेंद्र सिंह ने सदन को बताया कि वर्ष 2024 में एंटी-पेपर लीक कानून लागू होने के बाद से अब तक 52 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। उनके अनुसार, यह दर्शाता है कि कानून केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार सक्रिय रूप से कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करती हैं और सरकार ऐसे अपराधों के प्रति “शून्य सहिष्णुता” की नीति अपनाए हुए है।
सरकार का कहना है कि संशोधन के बाद कानून और अधिक प्रभावी होगा तथा संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी। नए प्रावधानों के तहत जांच एजेंसियों को भी ऐसे मामलों में अधिक कानूनी मजबूती मिलेगी, जिससे परीक्षा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई संभव होगी।
हालांकि, विधेयक को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि केवल सजा बढ़ा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका कहना था कि सरकार को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की सुरक्षा मजबूत करने तथा संस्थागत सुधारों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। विपक्ष का तर्क था कि बार-बार होने वाले पेपर लीक प्रशासनिक विफलता का परिणाम हैं और केवल कठोर दंड से इन घटनाओं पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती।
सदन में चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी भी की, जिसके बीच विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। हंगामे के बावजूद सरकार ने विधेयक को युवाओं के हित में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए इसे आवश्यक सुधार करार दिया।
पिछले कुछ वर्षों में NEET सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों ने देशभर में व्यापक चिंता पैदा की थी। लाखों अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे और कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। इन घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कानून में संशोधन का निर्णय लिया।
सरकार का दावा है कि संशोधित कानून परीक्षा माफिया के खिलाफ एक मजबूत कानूनी हथियार साबित होगा और इससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी। वहीं विपक्ष का कहना है कि कानून के साथ-साथ शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार भी उतने ही जरूरी हैं।
लोकसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक अब आगे की संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरेगा। यदि यह कानून के रूप में लागू होता है, तो देश में सार्वजनिक परीक्षाओं में धोखाधड़ी और पेपर लीक के मामलों पर पहले से कहीं अधिक कठोर दंडात्मक प्रावधान लागू होंगे।




