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एक और पेपर लीक! क्या ‘पेपर लीक सरकार’ की छवि से बाहर निकल पाएगी बीजेपी?

राजनीति/शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 27 जून 2026

महाराष्ट्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET-2026) का प्रश्नपत्र परीक्षा से महज एक दिन पहले कथित रूप से लीक होने के बाद राज्य सरकार को पूरी परीक्षा स्थगित करनी पड़ी। ठाणे में सीलबंद प्रश्नपत्र के पन्ने मिलने के बाद भिवंडी पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, कई लोगों को हिरासत में लिया और जांच शुरू कर दी है। महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरे राज्य के 1,028 परीक्षा केंद्रों पर होने वाली परीक्षा को फिलहाल टाल दिया गया है।

लेकिन यह सिर्फ महाराष्ट्र की एक घटना नहीं रह गई है। पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों में बार-बार सामने आए पेपर लीक के मामलों ने करोड़ों छात्रों का भरोसा हिला दिया है। हर नई घटना के साथ विपक्ष सरकार पर हमलावर हो जाता है और युवाओं के बीच यह सवाल और गहरा हो जाता है कि क्या मेहनत से ज्यादा अब लीक माफिया का नेटवर्क मजबूत हो गया है?

इसी मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र और बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “बीजेपी की सरकार में कोई ऐसा पेपर नहीं, जो लीक नहीं होता। यह सरकार ‘पेपर लीक सरकार’ बन चुकी है।” कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर महाराष्ट्र TET पेपर लीक का उल्लेख करते हुए इसे लगातार सामने आ रहे परीक्षा घोटालों की कड़ी बताया।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में NEET-UG परीक्षा को लेकर भी देशव्यापी विवाद हुआ था। पेपर लीक के आरोपों और परीक्षा प्रक्रिया पर उठे सवालों के बाद दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग करता रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई विपक्षी दलों का आरोप है कि लगातार हो रहे परीक्षा विवादों की नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय को लेनी चाहिए।

दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से निपटने के लिए सख्त कानून बनाए गए हैं, जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है। सरकार का दावा है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं।

लेकिन राजनीतिक दावों और जवाबों से अलग सबसे बड़ा नुकसान उस छात्र का होता है, जिसने महीनों या वर्षों तक परीक्षा की तैयारी की होती है। परीक्षा स्थगित होने का मतलब सिर्फ नई तारीख का इंतजार नहीं होता, बल्कि मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और भविष्य की अनिश्चितता भी होता है। लाखों परिवारों के सपने हर बार नई तारीखों और नई जांचों के बीच अटक जाते हैं।

आज देश का युवा यह नहीं पूछ रहा कि पेपर किसने लीक किया। वह यह पूछ रहा है कि आखिर हर कुछ महीनों में कोई न कोई परीक्षा विवादों में क्यों फंस जाती है? यदि हर बार जांच होगी, गिरफ्तारी होगी और परीक्षा रद्द होगी, तो व्यवस्था पर भरोसा कैसे बचेगा?

पेपर लीक अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है। यह शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता, सरकारी जवाबदेही और करोड़ों युवाओं के भविष्य का प्रश्न बन चुका है। जब तक परीक्षा प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह नहीं बनेगी, तब तक हर नया पेपर लीक केवल एक अपराध नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास पर एक और चोट माना जाएगा।

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