[the_ad id="179"]
Home » National » उद्धव ठाकरे को एक और बड़ा झटका: आदित्य के करीबी सचिन अहीर ने थामा शिंदे का हाथ

उद्धव ठाकरे को एक और बड़ा झटका: आदित्य के करीबी सचिन अहीर ने थामा शिंदे का हाथ

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 30 जून 2026

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) सचिन अहीर ने मंगलवार को उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। इसके तुरंत बाद उन्होंने महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति (डिप्टी चेयरमैन) पद के लिए शिंदे गुट के उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया।

सचिन अहीर को उद्धव ठाकरे के बेटे और शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे का बेहद करीबी माना जाता था। ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना केवल एक नेता का दल बदल नहीं, बल्कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के लिए एक बड़ा राजनीतिक और संगठनात्मक झटका माना जा रहा है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कुछ ही दिन पहले शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद भी पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए थे। लगातार हो रही इन बगावतों ने उद्धव ठाकरे की पार्टी की एकजुटता और भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के चुनाव में अब सत्तारूढ़ महायुति ने सचिन अहीर को अपना उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) के नेता और विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने पुष्टि की है कि महा विकास आघाड़ी (एमवीए) की ओर से जगन्नाथ अभ्यंकर उम्मीदवार होंगे।

सचिन अहीर के शिंदे गुट में शामिल होने के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार भी मौजूद रहे। इसे महायुति की ओर से शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) लगातार दबाव में दिखाई दे रही है। पहले कई सांसदों का पार्टी छोड़ना और अब आदित्य ठाकरे के करीबी नेता का शिंदे गुट में जाना इस बात का संकेत है कि संगठन के भीतर असंतोष अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

वहीं, शिंदे गुट इसे अपने बढ़ते राजनीतिक प्रभाव और संगठनात्मक मजबूती के रूप में पेश कर रहा है। आने वाले दिनों में यदि और नेता पाला बदलते हैं, तो महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति संतुलन और अधिक बदल सकता है।

महाराष्ट्र में अगले राजनीतिक घटनाक्रम पर अब सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि लगातार हो रहे दलबदल ने यह साफ कर दिया है कि शिवसेना की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि नए दौर में प्रवेश कर चुकी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *