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आंध्र प्रदेश में दित्वाह का गहरा खतरा—नेल्लूर, चित्तूर, तिरुपति और अन्नमय्या में रेड अलर्ट, मछुआरों को समुद्र में जाने से रोक

एबीसी डेस्क 29 नवंबर 2025

साइक्लोन दित्वाह की तेज़ रफ्तार और दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ते इसके दबाव ने पूरे प्रदेश में चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने 29 और 30 नवंबर को राज्य के दक्षिणी तटीय हिस्सों—विशेषकर नेल्लूर, चित्तूर, तिरुपति और अन्नमय्या जिलों—के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि इन इलाकों में व्यापक बारिश के साथ-साथ कहीं-कहीं बहुत भारी और अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना है। साइक्लोन से उठने वाली हवाओं, समुद्र में बढ़ती लहरों और लगातार बदलते वायुमंडलीय दबाव ने प्रशासन को पूरी सतर्कता की मुद्रा में ला दिया है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है, जबकि निम्न-स्तरीय इलाकों में जलभराव का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

विशाखापट्टनम स्थित साइक्लोन वार्निंग सेंटर (CWC) ने जानकारी दी है कि दित्वाह 1 दिसंबर की सुबह तक कमजोर होकर डीप डिप्रेशन में बदल जाएगा और उसी दिन शाम तक यह एक साधारण डिप्रेशन में तब्दील हो जाएगा। हालांकि, कमजोर होने के बावजूद इसका प्रभाव कम नहीं होगा—नदियों के उफान, तटीय हवाओं की तेजी और जमीन पर गिरने वाली भारी बारिश से मैदानी क्षेत्रों में स्थिति मुश्किल हो सकती है। मौसम विभाग ने चेताया है कि 30 नवंबर को दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में “एक्स्ट्रीमली हेवी रेनफॉल” यानी अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है, जो सड़कों, पुलों और ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी को बाधित कर सकती है।

तूफ़ान के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए प्रशासन ने दक्षिण तटीय इलाकों के मछुआरों को 1 दिसंबर तक समुद्र में न जाने की सख्त चेतावनी दी है। समुद्र में लहरों की ऊंचाई और तूफ़ानी हवाओं की गति अचानक बढ़ने की आशंका है, जिससे छोटी और मध्यम नौकाओं के पलटने का खतरा बना हुआ है। कई तटीय गांवों में मछुआरों की नावें किनारे पर खड़ी कर दी गई हैं और बंदरगाहों पर गतिविधियाँ लगभग ठप हैं।

राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने सभी आपदा प्रबंधन टीमों, SDRF-NDRF दस्तों और राहत अभियानों को सक्रिय कर दिया है। संवेदनशील इलाकों में स्कूल ऑडिटोरियम, पंचायत भवनों और सरकारी संस्थानों में अस्थायी राहत शिविर तैयार किए गए हैं। बिजली विभाग को संभावित बाधाओं से निपटने के लिए हाई-अलर्ट पर रखा गया है, क्योंकि तेज़ हवाओं और पेड़ गिरने से बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त होने का खतरा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि भारी बारिश से फसलों—विशेषकर धान, सब्जियों और बागवानी—को गंभीर नुकसान हो सकता है।

साइक्लोन दित्वाह की रफ्तार भले ही अगले 48 घंटों में कमजोर हो जाए, लेकिन इसके प्रभाव से दक्षिण आंध्र प्रदेश के कई जिलों में जीवन पूरी तरह ठप हो सकता है। मौसम विभाग और प्रशासन ने लोगों से आग्रह किया है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक चेतावनियों पर पूरी तरह भरोसा करें। यह दो दिन आंध्र प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं—और प्रशासन की चुनौती है कि भारी बारिश और तेज़ हवाओं के बीच जीवन को सुरक्षित और सामान्य बनाए रखा जाए।

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