मनोरंजन | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 1 सितंबर 2026
कृति सेनन के एक रक्षाबंधन विज्ञापन में पहने कपड़ों को लेकर चल रहे विवाद के बीच अभिनेत्री करीना कपूर से जब उनके अपने स्क्रीन लुक और कपड़ों को लेकर पसंद-नापसंद पर सवाल किया गया, तो उन्होंने जवाब देने से परहेज किया। मामला तब और दिलचस्प हो गया जब फिल्म निर्देशक मेघना गुलजार ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए सवाल को ही अनुचित बता दिया। ‘दायरा’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान करीना से पूछा गया था कि पर्दे पर वह किस तरह के कपड़े पहनने को लेकर अपनी सीमाएं तय करती हैं। सवाल सुनकर करीना कुछ असहज नजर आईं और इसी दौरान मेघना गुलजार ने बात संभालते हुए कहा कि किसी कलाकार के कपड़े उसके किरदार और निर्देशक की सोच के अनुसार तय होते हैं।
मेघना गुलजार ने स्पष्ट किया कि फिल्म में किसी महिला या पुरुष कलाकार को किस तरह के कपड़े पहनाए जाएंगे, यह उसके किरदार की जरूरत और निर्देशक की दृष्टि पर निर्भर करता है। उनका कहना था कि कलाकार की पोशाक को उसके चरित्र के संदर्भ में देखा जाना चाहिए और केवल एक अभिनेता से यह पूछना उचित नहीं है कि वह क्या पहनेंगे और क्या नहीं। इस तरह उन्होंने सवाल को व्यक्तिगत पसंद के बजाय फिल्म निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ दिया।
दरअसल, यह पूरा मामला उस समय चर्चा में आया जब ज्वेलरी ब्रांड GIVA के रक्षाबंधन विज्ञापन में कृति सेनन नजर आईं। विज्ञापन में कृति अपने भाई के साथ रक्षाबंधन मनाती दिखाई देती हैं और अपने पालतू कुत्ते को भी राखी बांधती हैं। विज्ञापन में उन्होंने इंडो-वेस्टर्न परिधान पहना था, जिसमें ब्रालेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट शामिल थे। इसी पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हुई और देखते ही देखते यह सवाल केवल एक विज्ञापन तक सीमित न रहकर कलाकारों की पोशाक, व्यक्तिगत पसंद और स्क्रीन पर उनकी सीमाओं तक पहुंच गया।
कृति सेनन के कपड़ों को लेकर उठे विवाद का असर सीधे करीना कपूर से पूछे गए सवाल में भी दिखाई दिया। हालांकि करीना ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की और सवाल का जवाब देने से बचती नजर आईं। ऐसे में मेघना गुलजार का हस्तक्षेप खासा महत्वपूर्ण हो गया, क्योंकि उन्होंने चर्चा को व्यक्तिगत पसंद या किसी अभिनेत्री के कपड़ों की समीक्षा से हटाकर किरदार की मांग और निर्देशक की रचनात्मक दृष्टि की तरफ मोड़ दिया।
फिल्मी दुनिया में कलाकारों के पहनावे को लेकर बहस कोई नई बात नहीं है। किसी फिल्म में पोशाक केवल फैशन का हिस्सा नहीं होती, बल्कि कई बार वह किरदार के व्यक्तित्व, कहानी के समय, सामाजिक पृष्ठभूमि और निर्देशक की कल्पना को भी सामने लाती है। यही वजह है कि मेघना गुलजार ने यह संकेत दिया कि किसी अभिनेता या अभिनेत्री से यह सवाल अलग से पूछना कि वह क्या पहनेंगे या क्या नहीं पहनेंगे, पूरी रचनात्मक प्रक्रिया को केवल व्यक्तिगत पसंद तक सीमित कर देता है।
इस पूरे विवाद में एक और दिलचस्प पहलू यह है कि एक रक्षाबंधन विज्ञापन से शुरू हुई चर्चा अब बॉलीवुड में कलाकारों के कपड़ों और उनकी पसंद की बड़ी बहस में बदलती दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया के दौर में किसी विज्ञापन में पहना गया परिधान कुछ ही घंटों में सार्वजनिक चर्चा का विषय बन जाता है। एक वर्ग उसे फैशन और रचनात्मक स्वतंत्रता के नजरिए से देखता है, तो दूसरा वर्ग सामाजिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के सवाल उठाता है।
करीना कपूर ने फिलहाल इस बहस में सीधे उतरने के बजाय चुप रहना पसंद किया, जबकि मेघना गुलजार ने उनके सामने आए सवाल को लेकर अपना नजरिया स्पष्ट कर दिया। उनका संदेश यही था कि कलाकार के कपड़ों को उसके किरदार से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए और किसी एक कलाकार को इस तरह के सवालों के कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।
अब देखना यह होगा कि कृति सेनन के विज्ञापन से शुरू हुआ विवाद आगे कितना बढ़ता है और क्या यह बहस केवल एक विज्ञापन की पोशाक तक सीमित रहती है या फिर बॉलीवुड में कलाकारों की व्यक्तिगत पसंद, रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच संतुलन पर एक बड़ी चर्चा को जन्म देती है। फिलहाल इतना जरूर है कि कपड़ों पर शुरू हुई बहस ने करीना से सवाल करवाया और मेघना गुलजार को जवाब देने के लिए मजबूर कर दिया।




