राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 16 अप्रैल 2026
लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान Akhilesh Yadav ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन बिना जाति जनगणना के इसे लागू करना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के साथ न्याय नहीं करेगा।
सदन में बोलते हुए अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि सरकार जाति जनगणना कराने से क्यों बच रही है। उनका कहना था कि यदि वास्तविक सामाजिक आंकड़े सामने नहीं आएंगे, तो आरक्षण का लाभ उन वर्गों तक नहीं पहुंचेगा जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज की महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किए बिना किसी भी आरक्षण व्यवस्था को अधूरा माना जाएगा।
इस दौरान सदन में माहौल कई बार गरमाया। विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि चर्चा के दौरान अखिलेश यादव की बातों को बीच-बीच में बाधित किया गया। सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जिससे राजनीतिक माहौल और ज्यादा गरमा गया।
Samajwadi Party ने भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए भी वह यह मांग दोहरा रही है कि जाति आधारित जनगणना कराई जाए, ताकि वास्तविक सामाजिक संरचना के आधार पर नीतियां बनाई जा सकें। पार्टी का मानना है कि बिना इस प्रक्रिया के आरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा।
वहीं, Bharatiya Janata Party और सरकार की ओर से इस विधेयक को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि इससे संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और लोकतंत्र अधिक समावेशी बनेगा।
संसद में चल रही इस बहस ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि महिला आरक्षण का मुद्दा केवल प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ सामाजिक न्याय, आंकड़ों की पारदर्शिता और राजनीतिक रणनीति जैसे कई बड़े सवाल भी जुड़े हुए हैं।
विशेष सत्र के दौरान उठे इन सवालों ने आने वाले समय में राजनीतिक बहस को और तेज करने के संकेत दे दिए हैं, खासकर तब जब देश 2029 के आम चुनाव की ओर बढ़ रहा है।




