राष्ट्रीय / तेलंगाना | ABC NATIONAL NEWS | 16 अप्रैल 2026
हैदराबाद। तेलंगाना सरकार द्वारा कराए गए व्यापक जाति एवं सामाजिक-आर्थिक सर्वे ने राज्य की सच्चाई को बेनकाब कर दिया है। पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने बुधवार को रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष जारी करते हुए बताया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के समुदाय सामान्य श्रेणी की तुलना में तीन गुना ज्यादा पिछड़े पाए गए हैं। इस सर्वे में पूरे राज्य की आबादी का करीब 97 प्रतिशत यानी 3.55 करोड़ लोगों को शामिल किया गया था, जिसमें 42 अलग-अलग संकेतकों के आधार पर 242 जाति समूहों का विस्तृत विश्लेषण किया गया। समग्र पिछड़ापन सूचकांक में राज्य का औसत स्कोर 81 रहा, जबकि SC-ST का स्कोर जनरल कैटेगरी से तीन गुना अधिक निकला। OBC का स्कोर भी जनरल से 2.7 गुना ज्यादा रहा। जितना स्कोर ज्यादा, उतना ज्यादा पिछड़ापन माना गया है।
मंत्री प्रभाकर ने कहा कि सामाजिक और आर्थिक असमानताएं बेहद गहरी हैं और ये आंकड़े विकास की राह में कितनी बड़ी बाधाएं खड़ी कर रहे हैं, इसे साफ दिखाते हैं। सर्वे के मुताबिक राज्य की 135 जातियां, जो कुल आबादी का करीब 67 प्रतिशत हैं, औसत से ज्यादा पिछड़ी हुई हैं। इनमें 69 BC, 41 SC और 25 ST जातियां शामिल हैं। सबसे ज्यादा पिछड़ी SC समुदाय की दक्कल जाति का स्कोर 116 रहा, जबकि सबसे कम पिछड़ी कापू जाति का स्कोर मात्र 12 रहा। रिपोर्ट बताती है कि SC-ST समुदायों में 78 प्रतिशत से ज्यादा परिवारों की सालाना आय एक लाख रुपये या उससे भी कम है। वहीं जनरल कैटेगरी में 13 प्रतिशत से ज्यादा परिवारों की आय पांच लाख से 50 लाख रुपये के बीच है। SC-ST में सिर्फ 2.1 प्रतिशत परिवार ही पांच लाख से ज्यादा आय वाले हैं।
सर्वे में रोजगार की स्थिति भी बेहद चिंताजनक सामने आई है। अनुसूचित जातियों में करीब 50 प्रतिशत लोग दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं, जबकि जनरल कैटेगरी में यह आंकड़ा सिर्फ दसवें हिस्से के आसपास है। अनुसूचित जनजातियों में मात्र 5 प्रतिशत लोग ही निजी क्षेत्र में अच्छी नौकरियों में हैं, जबकि जनरल कैटेगरी में यह आंकड़ा 30 प्रतिशत से ऊपर है। बुनियादी सुविधाओं की बात करें तो 21.2 प्रतिशत घरों में नल का पानी नहीं पहुंचता, 13.3 प्रतिशत घरों में शौचालय नहीं है और 5.8 प्रतिशत घरों में बिजली का सही कनेक्शन तक नहीं है। बड़ी संख्या में लोग अभी भी सूदखोरों से कर्ज लेने को मजबूर हैं, खासकर इलाज के लिए। कई परिवार छोटे-छोटे घरों में ठसाठस रह रहे हैं, उनके पास न तो पर्याप्त जमीन है और न ही स्थायी आय का कोई जरिया।
रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना में SC की आबादी 17.43 प्रतिशत यानी 61.84 लाख, ST की 10.45 प्रतिशत यानी 37.05 लाख और OBC (गैर-मुस्लिम) की 46.25 प्रतिशत है। मदिगा सबसे बड़ी SC उपजाति है, जो 10.3 प्रतिशत आबादी के साथ 36.58 लाख लोगों की है। इसके बाद शेख मुस्लिम, मुदिराज और लंबादी जैसी जातियां प्रमुख हैं। सरकार अब इन आंकड़ों के आधार पर लक्षित योजनाएं बनाने की तैयारी कर रही है, ताकि वास्तविक पिछड़े समुदायों तक विकास की रोशनी पहुंच सके। यह सर्वे न सिर्फ तेलंगाना बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ा दस्तावेज साबित हो सकता है, खासकर जब केंद्र सरकार भी राष्ट्रीय स्तर पर जाति जनगणना की चर्चा कर रही है।
पोन्नम प्रभाकर ने जोर देकर कहा कि ये आंकड़े किसी को संतुष्ट करने के लिए नहीं, बल्कि सच्चाई को स्वीकार कर नीति बनाने के लिए हैं। राज्य में विकास तो हुआ है, लेकिन वह असमान रूप से हुआ है, जिसकी वजह से कुछ समुदाय विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर रह गए हैं। अब सरकार का फोकस इन्हीं आंकड़ों के आधार पर शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं में सुधार लाने पर होगा, ताकि असली समानता की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।




