राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 26 जुलाई 2026
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के एक दिन बाद प्रह्लाद जोशी ने रविवार को नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में औपचारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी ग्रहण की।
धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार, 25 जुलाई को NEET पेपर लीक विवाद और देशभर में CJP के नेतृत्व में चले छात्र आंदोलन के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। आंदोलनकारी लंबे समय से प्रधान को हटाने की मांग पर अड़े थे। उनके इस्तीफे के बाद सरकार ने वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की कमान सौंपी।
प्रह्लाद जोशी के पास पहले से ही उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी है। अब शिक्षा मंत्रालय भी उनके पास आ गया है। इस तरह सरकार के भीतर उनका दायित्व और बढ़ गया है।
जोशी ऐसे समय शिक्षा मंत्रालय संभाल रहे हैं जब देश की परीक्षा व्यवस्था गंभीर सवालों के घेरे में है। NEET पेपर लीक के बाद छात्रों के व्यापक विरोध, NTA में कार्रवाई और परीक्षा सुधारों की मांग ने सरकार पर दबाव बढ़ाया है। केंद्र ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित नकल के खिलाफ कानून को और कठोर बनाने के लिए Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 भी तैयार किया है, जिसे 27 जुलाई को संसद में पेश किए जाने की संभावना है।
इसलिए नए शिक्षा मंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल मंत्रालय का प्रशासन संभालना नहीं, बल्कि छात्रों का भरोसा वापस हासिल करना और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करना होगी। पेपर लीक रोकने, NTA में सुधार, प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने जैसे मुद्दे तत्काल उनकी प्राथमिकताओं में रहने की संभावना है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा की है, लेकिन संगठन ने स्पष्ट किया है कि वह शिक्षा सुधारों से जुड़े अपने पांच सूत्री चार्टर पर आगे भी नजर रखेगा और चार सप्ताह बाद प्रगति की समीक्षा करेगा।
ऐसे में प्रह्लाद जोशी के लिए आने वाले कुछ सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण होंगे। छात्र आंदोलन ने सरकार को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी अब केवल प्रशासनिक मामला नहीं है, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही और युवाओं के भरोसे से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है।
प्रधान के इस्तीफे से राजनीतिक संकट का एक अध्याय जरूर बंद हुआ है, लेकिन प्रह्लाद जोशी के सामने अब असली चुनौती उस व्यवस्था को दुरुस्त करने की है जिसने लाखों छात्रों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया।




