[the_ad id="179"]
Home » National » अभिजीत दीपके को सशर्त जमानत, नेहा बोरा भी रिहा; ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के बाद दिल्ली में पुलिस पर सवाल

अभिजीत दीपके को सशर्त जमानत, नेहा बोरा भी रिहा; ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के बाद दिल्ली में पुलिस पर सवाल

सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को बॉन्ड भरने के बाद रिहाई मिली। AISA अध्यक्ष नेहा बोरा पहले ही रिहा हो चुकी हैं। प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट के मामलों में दिल्ली पुलिस ने कम से कम 10 FIR दर्ज कीं।

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 अक्टूबर 2026

दिल्ली में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को शनिवार, 17 अक्टूबर को सशर्त जमानत पर रिहा कर दिया गया। उन्हें शुक्रवार को ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने जाते समय दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। शनिवार को उन्हें विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत में पेश किया गया, जहां बॉन्ड भरने के बाद उनकी रिहाई हुई। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी शनिवार सुबह रिहा कर दिया गया था।

यह पूरा घटनाक्रम विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूचियों में किए जा रहे बदलावों और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच सामने आया है। शुक्रवार को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क के आसपास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी तिरंगा लेकर जुटे थे। छात्र संगठनों, कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में हिस्सा लिया। शाम होते-होते प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या बढ़ती गई।

शुक्रवार को हिरासत, शनिवार को रिहाई

दिल्ली पुलिस ने 16 अक्टूबर को मार्च में शामिल होने जा रहे अभिजीत दीपके और नेहा बोरा को एहतियातन हिरासत में लिया था। पुलिस के अनुसार, नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद रिहा किया गया। वहीं, अभिजीत दीपके के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई शुरू की गई और उन्हें विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।

शनिवार को अभिजीत दीपके की रिहाई की खबर सामने आने के बाद CJP समर्थकों ने राहत जताई। पार्टी की ओर से कहा गया कि दीपके को बॉन्ड भरने के बाद सशर्त जमानत मिली है। हालांकि, उनकी हिरासत और अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया को लेकर पार्टी के नेताओं ने सवाल भी उठाए।

CJP की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि दीपके के मामले की सुनवाई में देरी हुई। दीपके को अदालत में पेश किए जाने के दौरान मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी।

‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में क्यों जुटे प्रदर्शनकारी?

कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क के पास शुक्रवार को हुए मार्च में प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय ध्वज लेकर पहुंचे थे। इस प्रदर्शन का संबंध मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठ रहे सवालों से था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।

SIR को लेकर राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समूहों के बीच बहस तेज है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया चुनावी व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का स्पष्ट जवाब देना और नागरिकों का भरोसा बनाए रखना चुनावी संस्थाओं के लिए अहम है।

दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद लोगों के जुटने पर पुलिस ने कार्रवाई की। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, कनॉट प्लेस में 16 अक्टूबर की शाम लागू BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा के उल्लंघन के मामले में कम से कम दो FIR दर्ज की गईं।

प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट के मामलों में 10 FIR

इस पूरे घटनाक्रम के बीच दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट के मामलों में कम से कम 10 FIR दर्ज की हैं। नागरिकों, कार्यकर्ताओं और मीडिया संगठनों की ओर से लगातार दबाव बनाए जाने के बाद इन मामलों में कार्रवाई की जानकारी सामने आई।

17 अक्टूबर को महिला संगठनों ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय की ओर मार्च किया। प्रदर्शनकारियों ने SIR के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान महिलाओं के साथ कथित यौन उत्पीड़न और पुलिस कार्रवाई के मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग की। बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास भी महिला प्रदर्शनकारी जुटीं।

इन घटनाओं ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस के व्यवहार, महिलाओं की सुरक्षा और शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर बहस तेज कर दी है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है, ताकि किसी भी शिकायत को नजरअंदाज न किया जाए और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई हो सके।

जुलाई की हिंसा की जांच के लिए पोर्टल शुरू

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक पैनल ने जुलाई 2026 में जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर हुई हिंसा की जांच के लिए एक पोर्टल शुरू किया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, जांच में प्राथमिकता उन मामलों को दी जाएगी जिनमें पेलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने या परेशान करने, अत्यधिक बल प्रयोग और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की शिकायतें शामिल हैं।

यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदर्शन के दौरान हिंसा या पुलिस कार्रवाई से जुड़ी शिकायतों की जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता जरूरी है। शिकायतों की व्यवस्थित जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किन परिस्थितियों में हिंसा हुई, कहां बल प्रयोग किया गया और क्या किसी पक्ष की ओर से नियमों का उल्लंघन हुआ।

23 अक्टूबर को दिल्ली कूच करेंगे किसान संगठन

SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले कई किसान संगठन 23 अक्टूबर को दिल्ली कूच करने की तैयारी में हैं। उनकी मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें।

दूसरी ओर, कांग्रेस ने रामलीला मैदान में रैली आयोजित करने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) हासिल कर लिया है। दिल्ली पुलिस के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह के अनुसार, रामलीला मैदान, CBD ग्राउंड और बुराड़ी ग्राउंड को प्रदर्शन स्थलों के रूप में निर्धारित किया गया है। नगर निगम ने कांग्रेस को बताया है कि रामलीला मैदान 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक उपलब्ध रहेगा।

इन घटनाक्रमों से साफ है कि SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक विरोध आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। दिल्ली में प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के प्रबंधन की चुनौती भी बनी हुई है।

अभिजीत दीपके की रिहाई और नेहा बोरा की रिहाई के बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ है। एक तरफ पुलिस निषेधाज्ञा के उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई कर रही है, तो दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच की मांग उठ रही है। अब निगाहें इन मामलों की जांच, दर्ज FIR पर आगे की कार्रवाई और आने वाले दिनों में प्रस्तावित प्रदर्शनों पर रहेंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *