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‘सेफ जोन’ का सच: UN ने कहा — मौत के अड्डे हैं ये इलाके

जिनेवा / गाज़ा 4 अक्टूबर 2025

संयुक्त राष्ट्र ने एक तर्कपूर्ण और कटु टिप्पणी की कि गाज़ा में जो इलाके इस्राइली सेना द्वारा “सुरक्षित ज़ोन (safe zones)” के नाम पर घोषित किए गए हैं, वे वास्तव में “मौत के ठिकाने” हैं। यूनीसेफ के प्रवक्ता जेम्स एल्डर ने कहा कि ये ज़ोन एक भ्रम हैं, और निर्दोष नागरिकों को यह झूठी आशा दी जा रही है कि वहां उन्हें सुरक्षा मिलेगी। 

तथाकथित “सेफ ज़ोन” दक्षिणी गाज़ा में ऐसे इलाकों को कहा जाता है जहाँ इस्राइली सेना ने नागरिकों को शिफ्ट होने का निर्देश दिया था। लेकिन UN रिपोर्ट और स्थानीय गवाहों के अनुसार, इन इलाकों को बमबारी से नहीं छोड़ा गया है — स्कूल, तंबू, शेल्टर और अस्थायी आवास भी लक्ष्यों में शामिल रहे हैं। एल्डर ने बताया कि “स्कूल जो शेल्टर बनाये गए थे वे अक्सर मलबे में तब्दील हो जाते हैं, और तंबू नियमित रूप से हवाई हमलों में आग में जल जाते हैं।” 

UN का कहना है कि केवल यह कह देना कि “लोगों को दक्षिण चले जाओ” या “सेफ ज़ोन में चले जाओ” काफी नहीं है — जब वहां भी बम बरसते हैं, तो नागरिकों को कौन सुरक्षा देगा? एल्डर के अनुसार, ये ज़ोन घनी आबादी वाले इलाकों में स्थित हैं, जहां मूलभूत जीवन-सुविधाएँ लगभग समाप्त हो चुकी हैं — पानी, खाना, चिकित्सा सहायता सब अभाव में हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि “blanket evacuation orders जारी करने से नागरिक अपनी नागरिक सुरक्षा खो नहीं देते, लेकिन उन्हें कहीं सुरक्षित नहीं भेजा गया।” 

इस्राइल ने अल-मावासी नामक तटीय क्षेत्र को “मानवीय ज़ोन” के रूप में घोषित किया है, जिसमें सहायता, चिकित्सा सुविधाएँ और आधारभूत संरचनाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र पर भी बार-बार हमले हुए हैं, जबकि इसे “सेफ ज़ोन” कहा जा रहा था। एल्डर ने कहा कि इस तरह के हमले यह दिखाते हैं कि “सेफ ज़ोन” का प्रयोग एक रणनीतिक उपकरण बन गया है, न कि नागरिक सुरक्षा का उपाय। 

हालाँकि इस्राइली सेना का तर्क है कि ये ज़ोन केवल निर्दोषों को निकासी और सुरक्षा की सुविधा देने के लिए घोषित किए गए हैं और हमले का लक्ष्य हामास के ठिकानों को निशाना बनाना है। लेकिन जब हथियार और नागरिक एक ही क्षेत्र में हों, तो विभाजन करना मुश्किल हो जाता है — और इस वजह से इन ज़ोन में रहने वालों की मौत की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।

इस पूरी स्थिति ने एक भयावह सवाल खड़ा कर दिया है: क्या गाज़ा में ऐसा कोई स्थान बचा ही है जिसे सचमुच सुरक्षित कहा जा सके? UN और अन्य सहायता एजेंसियाँ इस प्रश्न का जवाब नकारात्मक देती दिख रही हैं — तब तक जब तक युद्ध जारी है और अधिक निर्दोष जीवन विस्मृत नहीं हो जाते।

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