करूर/चेन्नई 29 सितंबर 2025
करूर में अभिनेता-नेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्त्री कझगम (TVK) की रैली में मची भगदड़ में 40 लोगों की मौत के बाद तमिलनाडु सरकार ने बेहद सावधानी भरा रुख अपनाया है। पुलिस ने TVK के जिला सचिव वी. पी. मथियाझगन और कई दूसरे-तीसरे पंक्ति के नेताओं पर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है, लेकिन विजय का नाम FIR में शामिल नहीं किया गया।
सरकार का यह रुख पूरी तरह राजनीतिक समझदारी पर आधारित माना जा रहा है। शीर्ष अफसरों के मुताबिक विजय के खिलाफ तत्काल कार्रवाई — गिरफ्तारी, पूछताछ या FIR में नाम डालना — सीधे तौर पर DMK के खिलाफ सहानुभूति लहर पैदा कर सकता है और विपक्ष को यह कहने का मौका देगा कि सरकार राजनीतिक प्रतिशोध ले रही है।
सरकार ने फिलहाल न्यायमूर्ति अरुणा जगदीशन की अध्यक्षता में एक महिला आयोग का गठन किया है जो घटना की जांच करेगा। मद्रास हाई कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने की संभावना के बीच सरकार चाहती है कि न्यायपालिका और जांच आयोग पहले कदम उठाएं, ताकि किसी भी सरकारी कार्रवाई को राजनीतिक दुश्मनी के रूप में न देखा जाए।
विजय ने रविवार को एक बयान जारी कर इसे “अपरिवर्तनीय क्षति” बताया और मृतकों के परिजनों के लिए 20-20 लाख रुपये और घायलों को 2-2 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की। हालांकि, घटना के बाद करूर से उनके तुरंत रवाना होने और मीडिया से दूरी बनाने पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।
DMK का यह सतर्क रुख इस बात को दर्शाता है कि सिनेमा और राजनीति के गहरे रिश्तों वाले तमिलनाडु में एक लोकप्रिय फिल्मस्टार पर सीधे वार करना राजनीतिक आत्मघाती कदम साबित हो सकता है। विजय का फैन बेस पहले से ही एक राजनीतिक शक्ति में तब्दील हो रहा है और जल्दबाज़ी में की गई कार्रवाई DMK के खिलाफ जनाक्रोश भड़का सकती है।
अब पूरा मामला न्यायमूर्ति जगदीशन आयोग की जांच और अदालत में लंबित याचिकाओं पर टिका है। आने वाले दिनों में तय होगा कि क्या जांच की आंच विजय तक पहुँचती है या DMK सरकार इसे केवल TVK के स्थानीय नेताओं की लापरवाही तक सीमित रखती है।




