राजनीति | प्रमोद कुमार | ABC NATIONAL NEWS | पटना | 14 मई 2026
बिहार विधान परिषद उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल की जीत के बाद Tejashwi Yadav का राजनीतिक आत्मविश्वास काफी बढ़ा हुआ नजर आया। भोजपुर-बक्सर स्थानीय प्राधिकार एमएलसी सीट पर आरजेडी उम्मीदवार की जीत के बाद तेजस्वी यादव ने भारतीय जनता पार्टी और एनडीए पर जोरदार हमला बोलते हुए दावा किया कि अगर देश में चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं तो एनडीए कहीं भी टिक नहीं पाएगा। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मशीनों के जरिए सत्ता में बैठे लोग “छल-कपट” करते हैं।
पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि भोजपुर-बक्सर एमएलसी उपचुनाव बैलेट पेपर से कराया गया था और जनता ने एनडीए को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि अगर बिहार विधानसभा चुनाव भी बैलेट पेपर से हुआ होता तो महागठबंधन को 150 से अधिक सीटें मिलतीं। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि पिछले चुनाव में मशीनों के जरिए जनादेश को प्रभावित किया गया और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर किया गया। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर ईवीएम बनाम बैलेट पेपर की बहस तेज हो गई है।
Rashtriya Janata Dal नेता ने कहा कि आज भी ईवीएम से मतगणना में पूरी रात लग जाती है, जबकि दावा किया जाता था कि मशीनों से परिणाम जल्दी आएंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मतगणना में उतना ही समय लग रहा है तो फिर बैलेट पेपर से चुनाव कराने में क्या दिक्कत है। तेजस्वी यादव ने कहा कि बैलेट पेपर में जनता का भरोसा ज्यादा है और उसमें किसी प्रकार की तकनीकी आशंका नहीं रहती। उन्होंने यह भी कहा कि देश में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए चुनाव आयोग को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए।
दरअसल, भोजपुर-बक्सर स्थानीय प्राधिकार एमएलसी सीट पर हुए उपचुनाव में आरजेडी उम्मीदवार सोनू राय ने जेडीयू प्रत्याशी कन्हैया प्रसाद को 350 से अधिक वोटों से हरा दिया। यह सीट पहले जेडीयू के पास थी और पार्टी ने पूर्व एमएलसी राधाचरण साह के बेटे को मैदान में उतारा था। लेकिन आरजेडी ने इस सीट पर जीत दर्ज कर एनडीए को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त का काम कर सकती है।
वहीं एनडीए नेताओं ने तेजस्वी यादव के बयान को हार की हताशा और राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश बताया है। बीजेपी और जेडीयू नेताओं का कहना है कि ईवीएम पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अविश्वास जताने जैसा है। उनका कहना है कि जब विपक्ष चुनाव जीतता है तो ईवीएम सही लगती है और हार होने पर उसी मशीन पर सवाल खड़े किए जाते हैं। इसके बावजूद तेजस्वी यादव का यह बयान आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।




