राष्ट्रीय | सुमन कुमार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 14 मई 2026
दिल्ली की राजनीति और न्यायिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई जब दिल्ली हाई कोर्ट की जज Justice Swarna Kanta Sharma ने कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने का फैसला सुना दिया। यह फैसला उस समय आया जब अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal, Manish Sisodia, Sanjay Singh समेत आम आदमी पार्टी के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना और मानहानि से जुड़ी कार्यवाही शुरू की। जस्टिस शर्मा के इस कदम को कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
अदालत में सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट कहा कि कानून के अनुसार जो न्यायाधीश अवमानना की कार्यवाही शुरू करता है, वह उसी मूल मामले की आगे सुनवाई नहीं कर सकता। इसी संवैधानिक और न्यायिक सिद्धांत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अब यह मामला किसी दूसरी बेंच को सौंपा जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि रिक्यूजल यानी स्वयं को अलग करने का निर्णय पूरी तरह प्रक्रिया और नियमों के तहत लिया गया है। इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर मामले को दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की थी और बाद में औपचारिक रिक्यूजल याचिका भी दायर की गई थी।
इस घटनाक्रम को आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि अदालत ने नेताओं के बयानों को गंभीर मानते हुए अवमानना की प्रक्रिया शुरू की है। आरोप है कि आप नेताओं ने न्यायपालिका और न्यायाधीश को लेकर सार्वजनिक मंचों पर ऐसी टिप्पणियां कीं जिन्हें अदालत की गरिमा के खिलाफ माना गया। अदालत के इस सख्त रुख ने राजनीतिक बयानबाजी और न्यायपालिका पर टिप्पणी को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। भाजपा नेताओं ने इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा की जीत बताया, जबकि आम आदमी पार्टी इसे राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देख रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करते हैं और अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। वहीं कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जस्टिस शर्मा का फैसला न्यायिक मर्यादा और निष्पक्षता की परंपरा को मजबूत करता है।
दिल्ली शराब नीति घोटाले से जुड़े मामले पहले ही राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई और विभिन्न अदालतों में चल रही सुनवाई के बीच अब यह नया मोड़ राजनीतिक तापमान को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।




