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सोनिया गांधी : नेतन्याहू से दोस्ती ने भारत को गूंगा बना दिया, इज़रायल की कार्रवाई नरसंहार

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नई दिल्ली 28 सितंबर 

 कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने फिलीस्तीन मुद्दे पर मोदी सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि सरकार की खामोशी भारत की आत्मा के खिलाफ अपराध है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी और इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नज़दीकी दोस्ती के कारण भारत की विदेश नीति “गूंगी और बहरी” बन गई है। सोनिया गांधी ने साफ कहा कि इज़रायल की सैन्य कार्रवाई को नरसंहार कहने से डरना भारत की परंपराओं के साथ धोखा है।

सोनिया गांधी ने कहा, “भारत हमेशा पीड़ितों और निर्दोषों के साथ खड़ा रहा है। लेकिन आज मोदी सरकार की चुप्पी भारत की अंतरराष्ट्रीय साख को गिरा रही है। नेतन्याहू से व्यक्तिगत मित्रता के कारण सरकार ने भारत को चुप कर दिया है। क्या यह वही भारत है जिसने रंगभेद और उपनिवेशवाद के खिलाफ पूरी दुनिया में नेतृत्व किया था?”

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने भारत की विदेश नीति को अपने निजी रिश्तों की प्रयोगशाला बना दिया है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि “सरकार ने विदेश नीति को मौन योग बना दिया है, जबकि हजारों मासूम फिलिस्तीनी बच्चे और महिलाएं मौत के घाट उतारी जा रही हैं।” सोनिया ने यह भी जोड़ा कि दोनों पक्षों की हिंसा निंदनीय है, लेकिन एक राष्ट्र की ओर से सामूहिक दंड देना किसी भी लोकतांत्रिक मूल्य के खिलाफ है।

कांग्रेस पार्टी का कहना है कि सरकार की चुप्पी भारत की छवि को नुकसान पहुंचा रही है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की नैतिक स्थिति को कमजोर कर रही है। कांग्रेस ने मांग की कि भारत तुरंत संयुक्त राष्ट्र में सक्रिय भूमिका निभाए और नरसंहार को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए।

राजनीतिक गलियारों में इस बयान से हलचल मच गई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस “एकतरफा बयान” देकर भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को नुकसान पहुंचा रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि यह बयान मानवता की रक्षा के लिए है। विपक्ष का दावा है कि मोदी सरकार ने देश को सिर्फ मित्र देशों के हित में झुका दिया है और भारत की ऐतिहासिक गुटनिरपेक्ष नीति को समाप्त कर दिया है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इज़रायल-फिलीस्तीन विवाद पर बहस तेज है और कई देश इज़रायल की कार्रवाइयों को युद्ध अपराध तक बता रहे हैं। सोनिया गांधी का यह आक्रामक रुख कांग्रेस के लिए राजनीतिक मोर्चा खोलने का संकेत है और आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक यह मुद्दा गूंजने की संभावना है।

 

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