उद्घाटन का ऐतिहासिक पल
10 अगस्त 2025 का दिन बेंगलुरु के लिए ऐतिहासिक बन गया, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बहुप्रतीक्षित ‘येलो लाइन’ मेट्रो का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की मौजूदगी में हुए इस शुभारंभ ने न केवल बेंगलुरु के परिवहन ढांचे में नई जान फूंकी, बल्कि शहर के मेट्रो नेटवर्क को 96 किमी से आगे बढ़ाकर भारत के सबसे उन्नत शहरी ट्रांजिट सिस्टम में से एक बना दिया। उद्घाटन के बाद पीएम मोदी ने एक परीक्षण यात्रा कर इस नई लाइन का अनुभव भी लिया।
लाइन की विशेषताएं और मार्ग
19.15 किमी लंबी यह येलो लाइन दक्षिण बेंगलुरु के आर.वी. रोड (रगीगुड्डा) को पूर्व के बॉम्मसंद्रा से जोड़ती है, जिसमें 16 आधुनिक स्टेशन शामिल हैं। इन स्टेशनों में प्रमुख हैं — आर.वी. रोड (ग्रीन लाइन इंटरचेंज), रगीगुड्डा, बीटीएम लेआउट, जयदवा अस्पताल (पिंक लाइन इंटरचेंज), सेंट्रल साइल्क बोर्ड, इलेक्ट्रॉनिक सिटी, हेब्बागोडी और बॉम्मसंद्रा। यह लाइन आईटी कॉरिडोर और औद्योगिक इलाकों को सीधे जोड़ती है, जिससे रोजाना लाखों कर्मचारियों और यात्रियों को यात्रा में सुविधा होगी।
यात्रियों के लिए राहत
येलो लाइन रोजाना लगभग 8 लाख यात्रियों की क्षमता रखती है, जिससे साइल्क बोर्ड, इलेक्ट्रॉनिक सिटी और आउटर रिंग रोड जैसे ट्रैफिक-प्रवण इलाकों में भारी राहत मिलेगी। किराया ₹10 से ₹90 तक तय किया गया है, जो दूरी पर आधारित है, और सेवा सुबह 5 बजे से देर रात तक उपलब्ध रहेगी। शुरुआती दिनों में ट्रेनें हर 25 मिनट के अंतराल पर चलेंगी, जिसे धीरे-धीरे 20 मिनट तक कम किया जाएगा। ड्राइवरलेस ट्रेन तकनीक और आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम के साथ यह लाइन समय की पाबंदी और सुरक्षा के मामले में भी बेहतरीन साबित होगी।
आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व
₹7,610 करोड़ की लागत से तैयार यह परियोजना सिर्फ एक परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि बेंगलुरु की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश है। आईटी हब और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स तक आसान पहुंच से न केवल व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी, बल्कि ट्रैफिक जाम और प्रदूषण में भी उल्लेखनीय कमी होगी। मेट्रो से निजी वाहनों पर निर्भरता कम होने से ईंधन की खपत घटेगी और पर्यावरण को लाभ मिलेगा।
भविष्य की योजनाएं और विस्तार
येलो लाइन के शुभारंभ के साथ ही बेंगलुरु मेट्रो के फेज 3 विस्तार की नींव भी रखी गई है। इससे आगे और अधिक उपनगरों व औद्योगिक क्षेत्रों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम बेंगलुरु को एक ‘मेट्रो-फर्स्ट’ शहर बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा, जहां सार्वजनिक परिवहन प्राथमिक साधन के रूप में उभरेगा।







