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E20 बना 420! राहुल गांधी ने पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा पर उठाए सवाल

कर्नाटक के 7 जिलों के 14 सैंपलों में 11 में 20% से ज्यादा एथेनॉल मिलने का दावा; IOCL के सैंपल में 31.2% और HPCL में 30.5% की मात्रा, तेल कंपनियों की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 8 नवंबर 2026

पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की केंद्र सरकार की नीति अब एक नए विवाद में घिर गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कर्नाटक सरकार की ओर से कराई गई पेट्रोल सैंपलों की जांच के नतीजे साझा करते हुए मोदी सरकार से पूछा है कि देशभर में पेट्रोल के नाम पर उपभोक्ताओं को वास्तव में क्या दिया जा रहा है। राहुल गांधी ने इस पूरे मामले को ‘E20 बना 420’ बताते हुए कहा कि जनता अपनी गाड़ी में पेट्रोल भरवा रही है या उससे ज्यादा मात्रा में एथेनॉल खरीदने को मजबूर है?

राहुल गांधी के मुताबिक, कर्नाटक के सात जिलों से लिए गए पेट्रोल के 14 सैंपलों में से 11 में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक पाई गई। इनमें इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL) के एक सैंपल में 31.2 प्रतिशत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के एक सैंपल में 30.5 प्रतिशत एथेनॉल दर्ज किया गया। यह आंकड़े निर्धारित E20 अनुपात से काफी अधिक हैं।

14 सैंपलों की जांच में क्या सामने आया?

कर्नाटक सरकार की ओर से साझा की गई रिपोर्ट में सरकारी और निजी, दोनों तरह की तेल कंपनियों के पेट्रोल सैंपलों में अलग-अलग मात्रा में एथेनॉल दर्ज किया गया है।

* IOCL पेट्रोल: 31.2 प्रतिशत

* HPCL पावर पेट्रोल: 30.5 प्रतिशत

* HPCL पेट्रोल: 27 प्रतिशत

* BPCL स्पीड पेट्रोल: 26.5 प्रतिशत

* नायरा पेट्रोल: 26.1 प्रतिशत

* शेल पेट्रोल: 25.5 प्रतिशत

* BPCL पेट्रोल: 24.2 प्रतिशत

* BPCL पेट्रोल: 22.6 प्रतिशत

* HPCL पेट्रोल: 22.4 प्रतिशत

* IOCL पेट्रोल: 20.8 प्रतिशत

* नायरा पेट्रोल: 20.6 प्रतिशत

रिपोर्ट में तीन अन्य सैंपलों में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से कम दर्ज की गई। इनमें BPCL का एक सैंपल 19.9 प्रतिशत, MRPL का 19.2 प्रतिशत और शेल का एक सैंपल 13.5 प्रतिशत था।

कंपनियों की अपनी लैब की रिपोर्ट पर सवाल

इस मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू तेल कंपनियों की अपनी प्रयोगशालाओं की जांच रिपोर्ट है। कर्नाटक सरकार के मुताबिक, शुरुआत में सैंपल IOCL और BPCL की इन-हाउस प्रयोगशालाओं में भेजे गए थे। लेकिन वहां से जारी रिपोर्ट में पेट्रोल की एथेनॉल मात्रा का उल्लेख नहीं किया गया, जबकि यह जांच का निर्धारित पैरामीटर था।

इसके बाद सैंपलों की जांच NABL से मान्यता प्राप्त और ISO प्रमाणित प्रयोगशालाओं में कराई गई। इन जांचों में एथेनॉल की मात्रा सामने आई। कर्नाटक सरकार ने इस आधार पर तेल कंपनियों की जांच प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

जनता की जेब और गाड़ियों पर क्या असर?

राहुल गांधी ने कहा कि उपभोक्ता पेट्रोल की कीमत चुका रहे हैं, लेकिन उनकी गाड़ियों में निर्धारित 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल वाला ईंधन पहुंचने की बात सामने आ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक है तो उसका आर्थिक नुकसान आखिर किसे उठाना पड़ेगा?

उनका कहना है कि निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल उन वाहनों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है जिन्हें इतनी मात्रा वाले ईंधन के इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं किया गया है। इससे माइलेज प्रभावित होने और ईंधन प्रणाली के कुछ हिस्सों में खराबी की आशंका हो सकती है। कर्नाटक सरकार के मंत्री ने भी वाहनों के पुर्जों और प्रदर्शन पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई है।

राहुल गांधी ने पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल की वास्तविक मात्रा की स्पष्ट जानकारी नहीं दिए जाने का मुद्दा भी उठाया। उनका सवाल है कि जब उपभोक्ता को यह नहीं बताया जाता कि वह कितना एथेनॉल मिला ईंधन खरीद रहा है, तो उसके पास अपनी जरूरत के मुताबिक विकल्प चुनने का अधिकार कैसे होगा?

तेल कंपनियों ने रिपोर्ट पर उठाए सवाल

दूसरी ओर, IOCL, BPCL और HPCL ने कर्नाटक सरकार की जांच के नतीजों पर सवाल उठाए हैं। तीनों सरकारी तेल कंपनियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि उनके मुताबिक ये दावे निर्धारित कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाओं के अनुसार की गई जांच से साबित नहीं होते। कंपनियों का कहना है कि उनके द्वारा देशभर में, कर्नाटक सहित, आपूर्ति किया जा रहा E20 पेट्रोल भारतीय मानक IS 17021 के अनुरूप है।

कंपनियों ने अक्टूबर 2026 में कर्नाटक में अपनाई गई सैंपलिंग और जांच पद्धति पर भी आपत्ति जताई है। इस तरह अब विवाद का एक अहम सवाल यह भी है कि सैंपल किस प्रक्रिया से लिए गए और उनकी जांच के लिए कौन-से तकनीकी मानक अपनाए गए।

मोदी सरकार से राहुल गांधी के सीधे सवाल

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा है कि देश में बिक रहे पेट्रोल में वास्तव में कितना एथेनॉल मिलाया जा रहा है? यदि 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल वाले सैंपल सामने आए हैं तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी? उपभोक्ताओं को पेट्रोल में एथेनॉल की वास्तविक मात्रा बताने की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है?

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार को खुली बहस की चुनौती अब भी कायम है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे को भी बहस में शामिल करने की बात कही और सवाल उठाया कि आखिर सरकार की नीतियों से वास्तविक फायदा किसे मिल रहा है।

अब केंद्र सरकार के सामने कर्नाटक की जांच रिपोर्ट, तेल कंपनियों की सफाई और उपभोक्ताओं की चिंताओं का जवाब देने की चुनौती है। सबसे जरूरी है कि स्वतंत्र और पारदर्शी जांच के जरिए पेट्रोल में एथेनॉल की वास्तविक मात्रा स्पष्ट की जाए और यदि निर्धारित मानकों का उल्लंघन साबित होता है तो जिम्मेदार कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई हो।

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