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हम बंगाल बीजेपी से नहीं, सुप्रीम कोर्ट से हारे : अभिषेक बनर्जी

टीएमसी महासचिव ने चुनावी प्रक्रिया, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल; कहा—मेरे खिलाफ कार्रवाई करनी है तो करो, मैं खुद अदालत में पेश होकर अपना पक्ष रखूंगा, पूरी सुनवाई का लाइव प्रसारण कराया जाए।

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता/नई दिल्ली | 6 नवंबर 2026

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के चुनावी घटनाक्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग और बीजेपी पर सीधे सवाल उठाए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “हम बंगाल बीजेपी से नहीं, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया से हारे हैं।” उनके इस बयान के केंद्र में अदालत के निर्देशों का कथित पालन न होना, मतगणना में रैंडमाइजेशन की प्रक्रिया और ईवीएम जलाए जाने का मामला है।

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि देश की सर्वोच्च अदालत कोई निर्देश देगी तो सरकार उसका पालन करने के लिए बाध्य होगी। लेकिन उनके मुताबिक, सरकार ने अदालत की अपनी गाइडलाइंस तक का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि 4 तारीख को मतगणना होनी थी, जबकि 2 तारीख को सुप्रीम कोर्ट ने रैंडमाइजेशन प्रोटोकॉल का पालन करने का निर्देश दिया था। इस प्रक्रिया में राज्य और केंद्र, दोनों के अधिकारियों की भागीदारी जरूरी थी, लेकिन उनके अनुसार मतगणना में एक भी राज्य अधिकारी शामिल नहीं किया गया।

उनका सवाल है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था तो उसका पालन क्यों नहीं हुआ? अदालत के आदेशों की अनदेखी हुई तो उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा? बनर्जी ने कहा कि इस पूरे मामले में जो कुछ हुआ, उसे देश के सामने सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

सुमित रॉय की गिरफ्तारी और एनकाउंटर की मांग पर भी उठाए सवाल

अभिषेक बनर्जी ने अपने निजी सहायक सुमित रॉय की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए पश्चिम बंगाल की पुलिस और न्यायिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस मामले में सुमित रॉय को गिरफ्तार किया गया है, उसी मामले में उनके खिलाफ चुनाव लड़ चुके एक व्यक्ति ने फेसबुक पर सुमित रॉय की तस्वीर पोस्ट की है। बनर्जी के मुताबिक, तस्वीर के साथ सुमित रॉय को फर्जी मुठभेड़ में मारने की मांग भी की गई है।

उन्होंने कहा कि यह पोस्ट अब भी फेसबुक पर मौजूद है और कोई भी उसे देख सकता है। उनका सवाल था, “सुमित रॉय इसी मामले में गिरफ्तार हैं और इसी मामले में उन्हें एनकाउंटर की धमकी दी जा रही है। हमारी न्यायपालिका कहां है? हमारा संविधान कहां है?”

बनर्जी ने पश्चिम बंगाल को पुलिसिया राज्य बताते हुए कहा कि राज्य में यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि कुछ न्यायाधीश तबादले के आदेशों के डर में जी रहे हैं। उन्होंने पूछा कि अगर न्यायाधीश ही दबाव में होंगे तो आम नागरिक को न्याय कैसे मिलेगा?

“गांधीजी ने क्या ऐसे देश की कल्पना की थी?”

अभिषेक बनर्जी ने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए पूछा, “हम किस तरह के देश में रह रहे हैं? क्या गांधीजी ने ऐसे देश की कल्पना की थी?” उन्होंने कहा कि बीजेपी ने देश को बर्बाद करके रख दिया है।

उनका कहना था कि संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जिम्मेदारी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है। लेकिन जब गिरफ्तार व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से एनकाउंटर में मारने की मांग की जाती है और चुनावी प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों का जवाब नहीं मिलता, तो लोगों का भरोसा कैसे कायम रहेगा?

बनर्जी ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर अभी कुछ भरोसा बाकी है, लेकिन वह अपनी बात दोहराते हैं—“हम बंगाल बीजेपी से नहीं, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया से हारे हैं।”

ईवीएम जलाए जाने पर अदालत ने ध्यान क्यों नहीं दिया?

अभिषेक बनर्जी ने चुनावी धांधली का आरोप लगाते हुए ईवीएम जलाए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि चुनाव में धांधली करके जीत हासिल की गई और एक महीने के भीतर सभी ईवीएम जला दी गईं। उनका कहना था कि अदालत ने इस घटना पर ध्यान नहीं दिया और न ही इस पर जरूरी संज्ञान लिया।

उन्होंने सवाल किया कि जब चुनावी प्रक्रिया और ईवीएम को लेकर इतने गंभीर सवाल उठाए जा रहे थे, तब अदालत ने इन मामलों पर ध्यान क्यों नहीं दिया? उनके अनुसार, अदालत को इन घटनाओं की जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए थी।

बनर्जी ने रैंडमाइजेशन प्रक्रिया में राज्य के अधिकारियों की गैरमौजूदगी, मतगणना के प्रोटोकॉल और ईवीएम जलाए जाने के मुद्दे को एक साथ रखते हुए कहा कि पूरी चुनावी प्रक्रिया को मजाक बनाकर रख दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में खुद पेश होने की चुनौती

अभिषेक बनर्जी ने सरकार और चुनाव आयोग को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनके बयान पर कार्रवाई करनी है तो वे स्वतः संज्ञान लेकर उनके खिलाफ कार्यवाही शुरू करें। वह खुद सुप्रीम कोर्ट में पेश होंगे और अपना मुकदमा स्वयं लड़ेंगे।

उन्होंने कहा कि पूरी सुनवाई का सीधा प्रसारण कराया जाए, ताकि देश की जनता देख सके कि अदालत के निर्देशों का पालन हुआ था या नहीं। उन्होंने दोहराया कि अदालत की एक भी गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया।

यह बयान केवल बंगाल की राजनीति तक सीमित नहीं है। इसमें चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन, ईवीएम की सुरक्षा, गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकार और न्यायाधीशों की स्वतंत्रता जैसे सवाल शामिल हैं।

अभिषेक बनर्जी ने अपनी बात में किसी तरह की नरमी नहीं दिखाई। उन्होंने सीधे सुप्रीम कोर्ट को बंगाल में अपनी पार्टी की हार के लिए जिम्मेदार ठहराया, चुनाव आयोग से कार्रवाई की चुनौती दी और न्यायाधीशों के तबादलों के डर का मुद्दा उठाया।

अब इन सवालों पर संबंधित संस्थाओं को स्पष्ट जवाब देना होगा। अदालत के निर्देशों का पालन हुआ या नहीं, मतगणना में रैंडमाइजेशन की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई, राज्य के अधिकारी उसमें शामिल क्यों नहीं थे, ईवीएम जलाए जाने की घटना पर क्या कार्रवाई हुई और सुमित रॉय के खिलाफ एनकाउंटर की मांग करने वाली सोशल मीडिया पोस्ट पर क्या कदम उठाए गए—इन सभी सवालों का जवाब जरूरी है।

अभिषेक बनर्जी का संदेश साफ है—अगर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं हुआ, तो इसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। लोकतंत्र में कोई भी संस्था सवालों से ऊपर नहीं है, चाहे वह सरकार हो, चुनाव आयोग हो या देश की सर्वोच्च अदालत।

“हम बंगाल बीजेपी से नहीं, सुप्रीम कोर्ट से हारे”—अभिषेक बनर्जी का यह बयान अब पूरे देश में न्यायपालिका और चुनावी व्यवस्था की जवाबदेही पर बहस का विषय बन गया है।

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