राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 नवंबर 2026
देश में SIR के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का विवाद अभी जारी है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के एक बयान ने सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। मंत्री ने कहा है कि लाभार्थियों को भुगतान का आधार अब आधार कार्ड नहीं रहेगा। इसके स्थान पर बायोमेट्रिक पहचान और वोटर ID का EPIC नंबर इस्तेमाल किया जाएगा।
इस बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए वोटर ID जरूरी कर दी गई, तो उन गरीबों और जरूरतमंदों का क्या होगा जिनके नाम मतदाता सूची में नहीं हैं, जिनके पास वोटर ID नहीं है या जिनका बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं हो पाता?
मंत्री के बयान का दायरा अभी स्पष्ट नहीं
ललन सिंह ने 30 अक्टूबर को दिल्ली में पंचायती राज मंत्रालय की राष्ट्रीय कार्यशाला में यह बात कही थी। इसके बाद 3 नवंबर को सिक्किम में भी उन्होंने इस प्रस्ताव को दोहराया। उनका कहना था कि आधार कार्ड आसानी से बन जाने के कारण लाभार्थियों की पहचान के लिए अब बायोमेट्रिक सत्यापन और EPIC नंबर का इस्तेमाल किया जाएगा।
लेकिन मंत्री ने यह नहीं बताया कि यह व्यवस्था किन योजनाओं पर लागू होगी, कब से लागू होगी और किन लोगों को इसके दायरे में लाया जाएगा। अब तक इस संबंध में कोई व्यापक सरकारी अधिसूचना या विस्तृत दिशा-निर्देश सामने नहीं आए हैं। India News – The Indian Express +2
सबसे बड़ा सवाल: वोटर लिस्ट से नाम कट गया तो क्या होगा?
यहीं से चिंता और गंभीर हो जाती है। यदि किसी पात्र नागरिक का नाम SIR के दौरान मतदाता सूची से हट जाता है, तो क्या वह भविष्य में सरकारी लाभ पाने के लिए EPIC नंबर प्रस्तुत कर पाएगा? जिन लोगों के पास वोटर ID नहीं है, उनका क्या होगा? बुजुर्गों, दिव्यांगों और मजदूरों के फिंगरप्रिंट बायोमेट्रिक मशीन पर मैच नहीं करते, तो उनके भुगतान की व्यवस्था क्या होगी?
ये सवाल केवल पहचान-पत्र तक सीमित नहीं हैं। इनका सीधा संबंध गरीबों के राशन, किसानों की आर्थिक सहायता, ग्रामीण आवास और बुजुर्गों, विधवाओं तथा दिव्यांगों की पेंशन जैसी सुविधाओं से जुड़ सकता है। यदि नई व्यवस्था में वैकल्पिक पहचान और शिकायत निवारण का स्पष्ट प्रावधान नहीं हुआ, तो सबसे अधिक परेशानी उन्हीं लोगों को होगी जिन्हें सरकारी सहायता की सबसे ज्यादा जरूरत है।
आधार से जुड़ी योजनाओं पर क्या पड़ेगा असर?
वर्तमान में कई केंद्रीय योजनाओं में आधार आधारित पहचान या आधार से जुड़े बैंक खातों के माध्यम से भुगतान किया जाता है। इनमें PM-किसान, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम जैसी योजनाएं शामिल हैं। राष्ट्रीय पशुधन मिशन की उद्यमिता विकास योजना में भी लाभ लेने के लिए आधार नंबर का प्रमाण या आधार प्रमाणीकरण आवश्यक है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि मंत्री का प्रस्ताव इन सभी योजनाओं पर लागू होगा या किसी नई पंचायती राज योजना तक सीमित रहेगा। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि पंचायती राज मंत्रालय के अंतर्गत फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है, जिसमें सीधे व्यक्तिगत लाभार्थियों के बैंक खातों में भुगतान किया जाता हो। इसलिए प्रस्ताव के वास्तविक दायरे पर सरकार की स्पष्ट जानकारी जरूरी है। BusinessToday +1
SIR और सरकारी योजनाओं को जोड़ने की आशंका
इस प्रस्ताव का समय भी महत्वपूर्ण है। देश में SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए लोगों को दस्तावेजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। ऐसे समय में यदि सरकारी योजनाओं के भुगतान के लिए भी EPIC नंबर को अनिवार्य किया जाता है, तो मतदाता सूची से बाहर हुए पात्र नागरिकों के सामने दोहरी मुश्किल खड़ी हो सकती है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इस प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा है कि वोट देने के अधिकार से जुड़ी समस्या अब सरकारी कल्याणकारी सुविधाओं तक पहुंच को प्रभावित कर सकती है। कांग्रेस ने इसे SIR के व्यापक प्रभावों से जोड़कर देखा है। Uni India +1
हालांकि, अभी यह कहना सही नहीं होगा कि SIR में नाम कटने से किसी व्यक्ति का राशन, आवास, पेंशन या स्वास्थ्य सुविधा स्वतः बंद हो जाएगी। ऐसा कोई सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ है। लेकिन यदि भविष्य में EPIC नंबर को अनिवार्य पहचान बना दिया जाता है, तो मतदाता सूची में नाम न रखने वाले पात्र नागरिकों के सामने वास्तविक बाधा पैदा हो सकती है।
सरकार को इन सवालों का जवाब देना होगा
* क्या आधार की जगह EPIC नंबर सभी केंद्रीय और राज्य सरकारी योजनाओं में अनिवार्य किया जाएगा?
* जिन नागरिकों के पास वोटर ID नहीं है, उनके लिए कौन-सा वैकल्पिक दस्तावेज मान्य होगा?
* SIR में जिन पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हट गए हैं, उनके सरकारी लाभ सुरक्षित कैसे रहेंगे?
* जिन बुजुर्गों, दिव्यांगों और मजदूरों का बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं हो पाता, उनके भुगतान की वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी?
* क्या सरकार इस बदलाव को लागू करने से पहले प्रभावित योजनाओं की सूची और विस्तृत दिशा-निर्देश सार्वजनिक करेगी?
आधार पर भरोसा खत्म या पहचान की नई शर्त?
सरकार ने वर्षों तक आधार को सरकारी योजनाओं और लाभार्थियों की पहचान से जोड़ने पर जोर दिया। अब केंद्रीय मंत्री कह रहे हैं कि लाभार्थियों के भुगतान का आधार आधार कार्ड नहीं, बल्कि बायोमेट्रिक और वोटर ID होना चाहिए। यदि यह प्रस्ताव व्यापक रूप से लागू होता है, तो यह सरकारी लाभ पाने की मौजूदा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होगा।
लेकिन अभी न प्रभावित योजनाओं की सूची सामने आई है, न लागू करने की समयसीमा और न ही कोई व्यापक सरकारी आदेश। इसलिए इसे देशभर में लागू हो चुका फैसला बताना सही नहीं होगा। सरकार को सबसे पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रस्ताव का दायरा क्या है और किन लाभार्थियों पर इसका असर पड़ेगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मतदाता सूची में नाम होना और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का पात्र होना दो अलग-अलग बातें हैं। किसी पात्र नागरिक को केवल इसलिए राशन, पेंशन, आवास या दूसरी सरकारी सहायता से वंचित नहीं किया जाना चाहिए कि उसका नाम मतदाता सूची में नहीं है।
जनता के सामने सवाल सिर्फ आधार का नहीं, उसके हक का है। सरकार यदि पहचान की नई व्यवस्था लाना चाहती है, तो उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई गरीब, मजदूर, बुजुर्ग, विधवा या दिव्यांग नागरिक कागजों और तकनीकी सत्यापन की उलझन में अपनी जरूरी सुविधाओं से वंचित न हो। जनता को भरोसा चाहिए, नई शर्तों और नई कतारों का बोझ नहीं।



