लाइफस्टाइल | ABC NATIONAL NEWS | चंडीगढ़ | 5 नवंबर 2026
दिवाली का नाम आते ही आंखों के सामने आमतौर पर काजू कतली, बेसन के लड्डू, बर्फी, पेड़े और मिठाइयों से सजी दुकानें आ जाती हैं। लेकिन इस बार त्योहार की मिठास में एक नया स्वाद घुल रहा है। युवा पीढ़ी अब सिर्फ पारंपरिक मिठाइयों तक सीमित नहीं रहना चाहती। उसकी पसंद में कॉफी मिल्क केक, बिस्कॉफ बर्फी और प्रोटीन लड्डू जैसी नई मिठाइयां तेजी से जगह बना रही हैं। मिठाई की पुरानी परंपरा कायम है, लेकिन उसके स्वाद, सजावट और पेश करने के अंदाज में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है।
इस दिवाली मिठाई की दुकानों पर पारंपरिक स्वाद के साथ आधुनिक डेजर्ट फ्लेवर का मेल देखने को मिल रहा है। कभी विदेशी डेजर्ट और कैफे तक सीमित रहने वाले फ्लेवर अब भारतीय मिठाइयों का हिस्सा बन रहे हैं। बिस्कॉफ का स्वाद बर्फी में, कॉफी का फ्लेवर मिल्क केक में और प्रोटीन का प्रयोग लड्डुओं में किया जा रहा है। मकसद साफ है—पुरानी मिठाई को नए अंदाज में पेश करना, ताकि युवा ग्राहक भी त्योहार की मिठास से जुड़ें।
मिठाई वही, अंदाज बिल्कुल नया
पारंपरिक मिठाइयों की लोकप्रियता आज भी बरकरार है, लेकिन युवा ग्राहकों की पसंद में विविधता आई है। अब मिठाई केवल स्वाद के लिए नहीं खरीदी जा रही, बल्कि उसका लुक, पैकेजिंग और गिफ्ट के रूप में उसका आकर्षण भी महत्वपूर्ण हो गया है।
कॉफी मिल्क केक उन लोगों को आकर्षित कर रहा है जिन्हें कॉफी का स्वाद पसंद है। वहीं बिस्कॉफ बर्फी भारतीय मिठाई और लोकप्रिय कैरेमलाइज्ड बिस्किट फ्लेवर का नया मेल है। प्रोटीन लड्डू उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे हैं जो त्योहार के दौरान भी अपनी फिटनेस और खानपान को लेकर सजग रहना चाहते हैं।
इस बदलाव के बीच काजू कतली, काजू बर्फी और पारंपरिक लड्डुओं की मांग खत्म नहीं हुई है। अंतर बस इतना है कि अब मिठाई की दुकानों को अलग-अलग पीढ़ियों की पसंद के हिसाब से अपनी रेंज तैयार करनी पड़ रही है।
बुजुर्गों को परंपरा, युवाओं को फ्यूजन का स्वाद
चंडीगढ़ की गोपाल स्वीट्स के निदेशक नवजोत सिंह के अनुसार, दिवाली पर मिठाइयों की खरीदारी में पीढ़ियों के बीच पसंद का अंतर साफ दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, बुजुर्ग ग्राहक अब भी काजू बर्फी और लड्डुओं जैसी पारंपरिक मिठाइयों को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि इनका त्योहारों और पारिवारिक यादों से भावनात्मक जुड़ाव है।
इसके विपरीत Gen Z और युवा पेशेवर नए फ्लेवर, फ्यूजन मिठाइयों और आकर्षक तरीके से सजाए गए गिफ्ट बॉक्स की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। उनके लिए मिठाई का स्वाद जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी उसकी प्रस्तुति और नया अनुभव भी है।
यही वजह है कि मिठाई विक्रेता अब एक ही दुकान में पारंपरिक मिठाइयों के साथ नए प्रयोग भी पेश कर रहे हैं। इससे परिवारों को एक ही जगह अलग-अलग पीढ़ियों की पसंद के विकल्प मिल रहे हैं।
दिवाली गिफ्टिंग में भी आया बदलाव
मिठाइयों के साथ-साथ दिवाली पर उपहार देने का तरीका भी बदल रहा है। पहले मिठाई का डिब्बा ही सबसे आम त्योहार उपहार हुआ करता था, लेकिन अब लोग ऐसे गिफ्ट हैम्पर तलाश रहे हैं जिनमें स्वाद के साथ सेहत और विविधता का भी ध्यान रखा गया हो।
इसी मांग को देखते हुए ब्रांड मिलेट चिप्स, मिलेट कुकीज, नट कुकीज और अधिक फाइबर तथा कम चीनी वाले उत्पादों को गिफ्ट पैक में शामिल कर रहे हैं। ऐसे हैम्पर उन लोगों को आकर्षित कर सकते हैं जो पारंपरिक मिठाइयों के अलावा कुछ अलग और अपेक्षाकृत हल्के विकल्प देना चाहते हैं।
यह बदलाव केवल मिठाई की दुकानों तक सीमित नहीं है। त्योहारों के दौरान उपहारों के बाजार में भी अब स्वास्थ्य, पैकेजिंग और व्यक्तिगत पसंद को महत्व दिया जा रहा है। ग्राहक ऐसे पैक पसंद कर रहे हैं जिन्हें परिवार, दोस्तों और कार्यालय के सहयोगियों को दिया जा सके।
सेहत और स्वाद के बीच संतुलन की तलाश
प्रोटीन लड्डू और कम चीनी वाले गिफ्ट हैम्पर की लोकप्रियता यह संकेत देती है कि त्योहारों में खानपान को लेकर लोगों की सोच बदल रही है। हालांकि, किसी मिठाई पर ‘प्रोटीन’, ‘मिलेट’ या ‘कम चीनी’ लिखा होना अपने आप में उसे पूरी तरह स्वस्थ विकल्प नहीं बना देता। उसकी वास्तविक पोषण गुणवत्ता सामग्री, चीनी, वसा और कुल कैलोरी पर निर्भर करती है।
फिर भी बाजार में ऐसे विकल्पों की मौजूदगी बताती है कि मिठाई निर्माता अब उन ग्राहकों को भी ध्यान में रख रहे हैं जो स्वाद के साथ अपनी खानपान संबंधी प्राथमिकताओं का ख्याल रखना चाहते हैं।
परंपरा खत्म नहीं, उसमें जुड़ रहे नए रंग
दिवाली की मिठाई भारतीय परिवारों के लिए केवल खाने की चीज नहीं, बल्कि रिश्तों, यादों और उत्सव का हिस्सा है। घर पहुंचने वाले मिठाई के डिब्बे, मेहमानों की आवभगत और अपनों के साथ मिठास बांटने की परंपरा आज भी कायम है। फर्क इतना है कि अब उस डिब्बे में काजू कतली के साथ बिस्कॉफ बर्फी या कॉफी मिल्क केक भी जगह बना सकता है।
Gen Z का यह नया स्वाद पारंपरिक मिठाइयों को पीछे छोड़ने की कोशिश नहीं, बल्कि उनमें नए प्रयोग जोड़ने का संकेत है। बाजार भी इसी बदलाव के अनुसार खुद को ढाल रहा है। इस दिवाली संदेश यही है कि मिठास की परंपरा पुरानी है, लेकिन उसे चखने का अंदाज हर पीढ़ी के साथ नया होता जा रहा है।



