राष्ट्रीय | संजीव कुमार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 5 नवंबर 2026
पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार इलाके में गुरुवार सुबह एक निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत अचानक ढह गई। इस हादसे में कम से कम दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई है। हादसा चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के नजदीक गली सत्तारा, शीश महल इलाके में हुआ। इमारत के गिरते ही आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए। सूचना मिलने के बाद दमकल विभाग और अन्य बचाव दल मौके पर पहुंचे।
यह हादसा ऐसे घने और पुराने आबादी वाले इलाके में हुआ है, जहां संकरी गलियां, आसपास सटी इमारतें और सीमित आवागमन राहत एवं बचाव कार्य को चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं। मलबे के नीचे लोगों के फंसे होने की आशंका के बीच बचाव दलों ने घटनास्थल पर अभियान शुरू किया। हादसे के बाद सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में दबे लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की रही।
दमकल विभाग को सुबह 9:50 बजे मिली सूचना
दिल्ली अग्निशमन सेवा के अनुसार, गुरुवार सुबह लगभग 9 बजकर 50 मिनट पर इमारत गिरने की सूचना मिली। दमकलकर्मियों के घटनास्थल पर पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोगों ने मलबे से चार लोगों को बाहर निकाल लिया था। इन सभी को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। यह जानकारी इस बात को भी रेखांकित करती है कि हादसे के तुरंत बाद आसपास के लोगों ने बचाव की कोशिश शुरू कर दी थी।
हालांकि, इमारत के मलबे में और लोगों के फंसे होने की आशंका बनी हुई थी। ऐसे में बचाव दलों के सामने मलबे को सावधानीपूर्वक हटाने और उसके नीचे किसी व्यक्ति के जीवित होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए तलाश अभियान चलाने की चुनौती थी। घटनास्थल पर राहत एवं बचाव अभियान जारी रहने के दौरान हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता था।
मुख्यमंत्री के आदेश पर एमसीडी की कार्रवाई
हादसे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री के आदेश पर नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) ने दो कनिष्ठ स्तर के अधिकारियों को निलंबित कर दिया। निलंबित अधिकारियों में एक सहायक अभियंता और एक कनिष्ठ अभियंता शामिल हैं।
इस कार्रवाई के बाद निर्माणाधीन इमारत की निगरानी, निर्माण संबंधी अनुमति, सुरक्षा मानकों और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इमारत के ढहने का तत्काल कारण क्या था और निलंबित अधिकारियों की कथित लापरवाही किस स्तर पर पाई गई है। इन सवालों का जवाब जांच और संबंधित विभागों की रिपोर्ट से ही सामने आएगा।
निर्माणाधीन इमारत का गिरना कई सवाल छोड़ गया
तीन मंजिला निर्माणाधीन इमारत का अचानक ढह जाना केवल एक स्थानीय हादसा नहीं है। यह निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था, भवन निर्माण के नियमों के पालन और नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। किसी भी निर्माणाधीन इमारत में संरचनात्मक मजबूती, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, नींव की स्थिति और आसपास की इमारतों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन बेहद जरूरी होता है।
पुरानी दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में यह जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। यहां एक इमारत के निर्माण या उसमें किए जा रहे बदलाव का असर आसपास के पुराने मकानों पर भी पड़ सकता है। ऐसे क्षेत्रों में निर्माण कार्य की अनुमति देने से लेकर उसकी निगरानी तक, हर स्तर पर सावधानी बरतना जरूरी है।
फिलहाल हादसे के कारणों को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। यह जांच का विषय है कि इमारत निर्माण के दौरान किसी तकनीकी खामी, कमजोर संरचना, नियमों के उल्लंघन या अन्य कारण से ढही। साथ ही यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा संबंधी नियमों का कितना पालन किया जा रहा था।
जवाबदेही केवल निलंबन तक सीमित न रहे
एमसीडी द्वारा दो अधिकारियों को निलंबित किया जाना प्रशासनिक कार्रवाई है, लेकिन इस हादसे में वास्तविक जवाबदेही तय करने के लिए विस्तृत जांच आवश्यक होगी। यह पता लगाया जाना चाहिए कि इमारत के निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी गई थी, निर्माण की निगरानी किस अधिकारी के जिम्मे थी, क्या निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था और क्या पहले भी किसी तरह की शिकायत या चेतावनी सामने आई थी।
यदि जांच में निर्माण नियमों के उल्लंघन या अधिकारियों की लापरवाही की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही आसपास की इमारतों की सुरक्षा का भी आकलन जरूरी है, ताकि किसी दूसरे हादसे की आशंका को कम किया जा सके।
इस समय सबसे महत्वपूर्ण काम मलबे में फंसे लोगों की तलाश, घायलों का उपचार और प्रभावित परिवारों को सहायता पहुंचाना है। लेकिन बचाव अभियान पूरा होने के बाद इस हादसे की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करना भी उतना ही जरूरी होगा। पुरानी दिल्ली की इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया है कि निर्माण कार्य में सुरक्षा की अनदेखी का परिणाम केवल संपत्ति का नुकसान नहीं, बल्कि लोगों की जान जाने के रूप में भी सामने आ सकता है।



