अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 30 अक्टूबर 2026
दुनिया उन्हें कभी अंतरिक्षयान का समझदार और शांत कप्तान कैप्टन जीन-ल्यूक पिकार्ड बनकर याद करेगी, तो कभी X-Men के उस प्रोफेसर के रूप में, जिसके पास असाधारण मानसिक शक्तियां थीं। लेकिन इन किरदारों के पीछे एक ऐसा कलाकार था, जिसने इंग्लैंड की गरीबी से निकलकर विश्व सिनेमा और रंगमंच में अपनी अलग पहचान बनाई। ब्रिटिश अभिनेता सर पैट्रिक स्टीवर्ट का 86 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। उनके निधन की जानकारी उनके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किए गए बयान में दी गई। Reuters +1
परिवार के बयान के अनुसार, स्टीवर्ट का 28 अक्टूबर को लॉस एंजिलिस स्थित उनके घर पर निधन हुआ। वह अल्जाइमर रोग और लेवी बॉडी डिमेंशिया से जूझ रहे थे। अंतिम समय में उनकी पत्नी सनी ओज़ेल उनके साथ थीं। उनके निधन से रंगमंच, टेलीविजन और फिल्मों की दुनिया ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसकी आवाज, अभिनय और व्यक्तित्व ने कई पीढ़ियों के दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। City News Vancouver +1
गरीबी से शुरू हुआ, शोहरत तक पहुंचा सफर
पैट्रिक स्टीवर्ट का जन्म 13 जुलाई 1940 को इंग्लैंड के यॉर्कशायर में हुआ था। उनका बचपन आर्थिक कठिनाइयों के बीच गुजरा। अभिनय की दुनिया में उनकी दिलचस्पी कम उम्र में ही पैदा हो गई थी। महज 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने पेशेवर अभिनेता के रूप में अपना सफर शुरू किया।
स्टीवर्ट की असली अभिनय प्रतिभा को निखारने में रंगमंच की बड़ी भूमिका रही। 1960 के दशक में वह प्रतिष्ठित रॉयल शेक्सपियर कंपनी से जुड़े और शेक्सपियर के नाटकों में अपने अभिनय से पहचान बनाई। मंच पर उनकी मजबूत आवाज, संवाद बोलने का अंदाज और किरदारों को गहराई से समझने की क्षमता ने उन्हें गंभीर अभिनेता के रूप में स्थापित किया। बाद में यही खूबियां उन्हें हॉलीवुड के बड़े पर्दे तक ले गईं। Reuters +1
47 साल की उम्र में मिला वह किरदार, जिसने दुनिया भर में पहचान दिलाई
स्टीवर्ट के करियर में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब उन्हें टेलीविजन सीरीज ‘स्टार ट्रेक: द नेक्स्ट जेनरेशन’ में कैप्टन जीन-ल्यूक पिकार्ड का किरदार मिला। उस समय उनकी उम्र 47 वर्ष थी।
पिकार्ड कोई साधारण अंतरिक्ष कप्तान नहीं था। वह मुश्किल परिस्थितियों में भी विवेक से फैसले लेने, बातचीत से समस्याएं सुलझाने और अपने साथियों का सम्मान करने वाला नेता था। स्टीवर्ट ने इस किरदार को ऐसी गंभीरता और गरिमा दी कि वह ‘स्टार ट्रेक’ की सबसे यादगार पहचान में शामिल हो गया।
1987 से 1994 तक प्रसारित इस सीरीज के बाद भी उन्होंने फिल्मों और ‘स्टार ट्रेक: पिकार्ड’ के जरिए इस भूमिका को आगे बढ़ाया। दुनिया भर के दर्शकों के लिए उनकी आवाज और चेहरा इस किरदार का पर्याय बन गए। The Guardian +1
X-Men के प्रोफेसर X बनकर नई पीढ़ी के चहेते बने
स्टीवर्ट की लोकप्रियता केवल विज्ञान-कथा तक सीमित नहीं रही। ‘X-Men’ फिल्मों में उन्होंने प्रोफेसर चार्ल्स जेवियर का किरदार निभाया। यह किरदार असाधारण मानसिक शक्तियों वाले म्यूटेंट्स का मार्गदर्शन करने वाले एक बुद्धिमान और संवेदनशील शिक्षक का था।
जहां पिकार्ड अंतरिक्ष में मानवता के भविष्य की तलाश करता था, वहीं प्रोफेसर X भेदभाव, नफरत और असमानता के बीच सह-अस्तित्व का रास्ता खोजता था। स्टीवर्ट ने दोनों किरदारों को अलग-अलग अंदाज में जीवंत किया, लेकिन दोनों में विवेक, धैर्य और मानवीय गरिमा की झलक दिखाई दी।
महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने किया था सम्मानित
नाटक और अभिनय की दुनिया में योगदान के लिए स्टीवर्ट को 2010 में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने नाइट की उपाधि से सम्मानित किया था। इसके बाद उनके नाम के साथ ‘सर’ जुड़ गया। यह सम्मान उनके लंबे और प्रभावशाली करियर की एक बड़ी उपलब्धि था। Reuters +1
एक कलाकार, जो किरदारों से आगे बढ़कर याद रहेगा
पैट्रिक स्टीवर्ट का सफर बताता है कि अभिनय में सफलता केवल बड़े बजट की फिल्मों या लोकप्रिय किरदारों से नहीं आती। वर्षों का अभ्यास, रंगमंच की साधना और अपने काम के प्रति समर्पण किसी कलाकार को स्थायी पहचान देते हैं।
उन्होंने शेक्सपियर के मंच से लेकर विज्ञान-कथा की दुनिया और सुपरहीरो फिल्मों तक अपनी प्रतिभा का विस्तार किया। उनके किरदारों ने दर्शकों को साहस, जिम्मेदारी, समझदारी और इंसानियत के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया।
आज कैप्टन पिकार्ड की कुर्सी खाली है और प्रोफेसर X की आवाज खामोश हो गई है। लेकिन पर्दे पर छोड़ी गई उनकी छाप आने वाले वर्षों तक कायम रहेगी। पैट्रिक स्टीवर्ट अब हमारे बीच नहीं हैं, मगर उनके निभाए किरदार दुनिया भर के दर्शकों की यादों में जीवित रहेंगे।



