राष्ट्रीय/ आपदा | ABC NATIONAL NEWS | हैदराबाद/भुवनेश्वर | 28 अक्टूबर 2026
आंध्र प्रदेश और ओडिशा में चक्रवात ‘अरनब’ ने भारी तबाही मचाई है। समुद्र तट से टकराने के बाद तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। आंध्र प्रदेश में कम से कम सात लोगों की मौत की खबर है। एक लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। कई इलाकों में पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग-16 पर भी कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा।
चक्रवात के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने दोनों राज्यों में बड़े पैमाने पर बचाव और राहत अभियान चलाया है। मौसम विभाग ने कई जिलों में भारी से अत्यंत भारी बारिश, तेज हवाओं और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की चेतावनी जारी की है। ऐसे में अगले 48 घंटे प्रभावित इलाकों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
आंध्र प्रदेश में 84 हजार से अधिक लोगों का रेस्क्यू
आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, राज्य में 84 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को सचिवालय में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और राहत एवं बचाव कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए।
राज्य में 290 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां 84,396 लोगों को ठहराया गया। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), नौसेना और तटरक्षक बल को अलर्ट पर रखा गया है।
विशाखापत्तनम, विजयनगरम, श्रीकाकुलम, अनकापल्ली, कोनसीमा और काकीनाडा सहित कई जिलों में भारी बारिश दर्ज की गई। पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ने से राष्ट्रीय राजमार्ग-16 कुछ घंटों तक बंद रहा, हालांकि बाद में रास्ता साफ कर दिया गया।
प्रशासन के सामने बिजली और पेयजल की आपूर्ति बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है। बिजली व्यवस्था बहाल करने के लिए 8,400 कर्मियों को तैयार रखा गया है। सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए टैंकरों और जनरेटरों की व्यवस्था की गई है।
सात मौतों की खबर, सरकार के आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार
रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश में कम से कम सात लोगों की मौत पेड़ गिरने या बिजली का करंट लगने से होने की खबर है। हालांकि, राज्य सरकार ने उस समय तक मौतों का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया था।
चक्रवात के दौरान बिजली के तार टूटने, पेड़ गिरने और सड़कों पर मलबा जमा होने से लोगों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में सफाई, पेयजल आपूर्ति और आवश्यक सेवाएं बहाल करने के निर्देश दिए हैं।
करीब पांच हजार गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया है, ताकि आपात स्थिति में उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता मिल सके।
ओडिशा में भी हाई अलर्ट, 30 हजार लोग सुरक्षित स्थानों पर
पड़ोसी राज्य ओडिशा में भी चक्रवात का असर बढ़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार, 30 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राज्य के दक्षिणी जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
मलकानगिरि, कोरापुट, रायगढ़ा, गजपति, गंजाम और नबरंगपुर के निचले तथा भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों से लोगों को राहत शिविरों में भेजा गया है। मलकानगिरि में सबसे अधिक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।
ओडिशा के 30 में से 16 जिलों में स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखे गए। प्रशासन ने 2,037 चक्रवात राहत शिविर तैयार किए हैं, जहां भोजन, पेयजल और जरूरी सामान उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
राज्य में 313 राहत एवं प्रतिक्रिया दल तैनात किए गए हैं। इनमें ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स की 60 टीमें, NDRF की नौ टीमें और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की 244 टीमें शामिल हैं। सभी 19,143 मछली पकड़ने वाली नौकाओं के तट पर लौटने की जानकारी भी दी गई है।
मौसम विभाग का रेड अलर्ट, भूस्खलन का खतरा
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, चक्रवात 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश-यानम तट से अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में टकराया। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई।
सुबह 8:30 बजे तक यह कमजोर होकर गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया और हवाओं की रफ्तार घटकर 110 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे रह गई। इसके अगले 48 घंटों में उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए दक्षिणी ओडिशा से गुजरने और फिर छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ते हुए कमजोर पड़ने का अनुमान जताया गया।
मौसम विभाग ने मलकानगिरि, कोरापुट, नबरंगपुर, रायगढ़ा, गजपति और कालाहांडी में 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश की आशंका के साथ रेड अलर्ट जारी किया। पहाड़ी इलाकों में स्थानीय स्तर पर भूस्खलन का खतरा भी बताया गया है। ओडिशा के कई अन्य जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश और तेज हवाओं का पूर्वानुमान है।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती
चक्रवात के बाद अब दोनों राज्यों के सामने लोगों की सुरक्षा, बिजली-पानी की बहाली, सड़कों से मलबा हटाने और प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने की चुनौती है। राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा और साफ-सफाई की व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है।
ओडिशा के आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि सरकार का प्राथमिक लक्ष्य किसी भी तरह की जनहानि को रोकना है। हालांकि, वास्तविक स्थिति का आकलन चक्रवात का प्रभाव कम होने और प्रभावित इलाकों तक राहत दलों की पहुंच बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगा।
आंध्र प्रदेश और ओडिशा में प्रशासन तथा आपदा प्रतिक्रिया दलों को सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेना, समुद्र और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहना तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना लोगों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।



