राष्ट्रीय/ राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 28 अक्टूबर 2026
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगा। मंगलवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं की उस मांग पर विचार करने की बात कही, जिसमें चुनाव आयोग से SIR से जुड़े सभी रिकॉर्ड और फैसलों को सुरक्षित रखने या उन्हें अदालत में पेश करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी इस मांग को लेकर याचिका दायर करने वालों में शामिल हैं। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और अधिवक्ता एस. प्रसन्ना ने अदालत के सामने पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं ने अपनी मांग को सीमित और किसी के काम में अनावश्यक दखल दिए बिना रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का अनुरोध बताया।
SIR के पूरे रिकॉर्ड पर नजर
याचिकाकर्ताओं की मांग है कि चुनाव आयोग SIR से संबंधित सभी दस्तावेज, निर्णय और उनसे जुड़ा पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखे। जरूरत पड़ने पर इन रिकॉर्ड को सुप्रीम कोर्ट में भी पेश किया जाए, ताकि प्रक्रिया और फैसलों की जांच की जा सके।
इस मांग का महत्व इसलिए है क्योंकि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधित करने की प्रक्रिया सीधे नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़ी है। रिकॉर्ड सुरक्षित रहने से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि फैसले किस आधार पर लिए गए, संबंधित अधिकारियों ने क्या प्रक्रिया अपनाई और निर्णयों का दस्तावेजी आधार क्या था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालत हर पहलू की जांच करेगी। सुनवाई के बाद मामले को आगे की सुनवाई के लिए लगभग 10 दिन बाद सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया गया।
चुनाव आयोग ने हलफनामे में क्या कहा?
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा है कि SIR से जुड़े उसके फैसले कानून के अनुरूप लिए गए हैं। आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को हटाने की प्रक्रिया पर भी अपना पक्ष रखा है।
आयोग के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हटाया जा सकता है, जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए लागू होती है। यह प्रावधान चुनाव आयोग के प्रमुख के पद को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है।
हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया और SIR के रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग दो अलग-अलग मुद्दे हैं। रिकॉर्ड से जुड़ी याचिका का उद्देश्य पुनरीक्षण प्रक्रिया में लिए गए फैसलों और उनके आधार की जांच के लिए दस्तावेज उपलब्ध रखना है।
पारदर्शिता क्यों जरूरी है?
मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को सही और अद्यतन बनाना है। लेकिन इस दौरान यदि किसी मतदाता का नाम हटता है या किसी प्रविष्टि पर सवाल उठता है, तो संबंधित रिकॉर्ड और निर्णयों की स्पष्ट जानकारी महत्वपूर्ण हो जाती है।
दस्तावेज सुरक्षित रखने से भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में अदालत तथ्यों की जांच कर सकती है। इससे यह भी स्पष्ट हो सकता है कि प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार अपनाई गई या नहीं।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड से जुड़ी मांग पर अंतिम आदेश नहीं दिया है। अदालत ने कहा है कि वह मामले के सभी पहलुओं पर विचार करेगी। अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि चुनाव आयोग को रिकॉर्ड सुरक्षित रखने या अदालत में पेश करने के संबंध में क्या निर्देश दिए जाते हैं।
इस मामले का परिणाम SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता और चुनाव आयोग के निर्णयों की न्यायिक जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।



