राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नागपुर | 21 अक्टूबर 2026
आंदोलन का उद्देश्य समाधान हो, विभाजन नहीं: भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित आंदोलनों और समाज में बढ़ते विभाजन को लेकर आगाह किया। उन्होंने कहा कि यह मानना गलत है कि समस्याओं का समाधान केवल आंदोलन करने से ही हो सकता है। उनके मुताबिक, विरोध प्रदर्शन सामाजिक समस्याओं और प्रशासनिक कमियों के कारण स्वाभाविक रूप से सामने आ सकते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य समाधान खोजना होना चाहिए, न कि समाज में दुश्मनी और विभाजन को बढ़ावा देना।
भागवत ने नागपुर में RSS के वार्षिक विजयादशमी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। विजयादशमी का यह आयोजन संघ के स्थापना दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
घरेलू अशांति का फायदा उठा सकती हैं बाहरी ताकतें
अपने संबोधन में भागवत ने चेतावनी दी कि जब कोई आंदोलन किसी व्यक्ति, समूह या विचारधारा के प्रति शत्रुता से प्रेरित होकर राजनीतिक हथियार बन जाता है, तो भारत को कमजोर बनाए रखने की कोशिश करने वाली बाहरी ताकतें इसका फायदा उठा सकती हैं।
उन्होंने सामाजिक असंतोष और प्रशासनिक कमियों के बीच अंतर करते हुए कहा कि समस्याओं का सामने आना असामान्य नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि उन समस्याओं से निपटने के लिए किस तरह का रास्ता अपनाया जाता है।
उनके अनुसार, आंदोलन यदि समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के बजाय विरोध और कटुता को बढ़ाने का माध्यम बन जाए, तो इससे समाज के भीतर मतभेद गहरे हो सकते हैं। ऐसी स्थिति देश की एकता और स्थिरता के लिए चुनौती पैदा कर सकती है।
सामाजिक समस्याओं और प्रशासनिक कमियों को स्वीकार करने पर जोर
भागवत ने माना कि सामाजिक समस्याओं और प्रशासनिक स्तर पर कमियों के कारण लोगों में असंतोष पैदा होता है और विरोध प्रदर्शन होते हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर समस्या के समाधान के लिए आंदोलन को ही एकमात्र रास्ता मानना सही नहीं है।
उनके संदेश का मुख्य जोर इस बात पर था कि असहमति और विरोध को समाज में शत्रुता बढ़ाने के बजाय समस्याओं को दूर करने की दिशा में ले जाना चाहिए।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब देश के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन चर्चा में हैं। ऐसे माहौल में भागवत ने आंदोलन के उद्देश्यों और उनके संभावित परिणामों पर विचार करने की जरूरत बताई।
‘हिंदू भावना’ से एकता का आह्वान
RSS प्रमुख ने समाज में एकता बनाए रखने और विभाजनकारी प्रवृत्तियों से बचने पर जोर दिया। उनके संबोधन में यह संदेश प्रमुख रहा कि देश की आंतरिक एकता को कमजोर करने वाली परिस्थितियों से सतर्क रहना चाहिए।
भागवत के मुताबिक, जब राजनीतिक विरोध किसी व्यक्ति या विचारधारा के प्रति शत्रुता में बदल जाता है, तो उसका असर व्यापक सामाजिक संबंधों पर भी पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में बाहरी ताकतों को देश के भीतर मौजूद मतभेदों का फायदा उठाने का अवसर मिल सकता है।
उन्होंने अपने संबोधन में सामाजिक समस्याओं के समाधान, आपसी एकता और देश की स्थिरता को महत्वपूर्ण बताया।
विजयादशमी संबोधन में एकता और स्थिरता का संदेश
RSS का वार्षिक विजयादशमी संबोधन संगठन के प्रमुख सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल है। इस अवसर पर मोहन भागवत ने आंदोलन, राजनीतिक विरोध और सामाजिक विभाजन से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।
उनका संदेश था कि विरोध प्रदर्शन अपने आप में समस्या का समाधान नहीं हैं। उनकी सार्थकता इस बात से तय होनी चाहिए कि वे समस्याओं को दूर करने में कितने सहायक हैं और समाज को किस दिशा में ले जाते हैं।
भागवत ने चेताया कि घरेलू अस्थिरता और सामाजिक विभाजन का लाभ भारत को कमजोर देखना चाहने वाली ताकतें उठा सकती हैं। इसलिए उनके अनुसार, असहमति के बावजूद सामाजिक एकता बनाए रखना और समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना जरूरी है।


