ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 19 अक्टूबर 2026
गरबा के मंच से मुसलमानों को जाने का ऐलान
गुजरात में नवरात्रि के दौरान आयोजित गरबा कार्यक्रमों में गैर-हिंदुओं को बाहर रखने की कोशिशों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल सहित कुछ हिंदुत्ववादी संगठनों ने राज्य के अलग-अलग स्थानों पर गरबा आयोजनों में गैर-हिंदुओं को शामिल होने से रोकने की मांग की है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई जगह मुस्लिम कर्मचारियों और संगीतकारों के साथ टकराव की घटनाएं भी सामने आई हैं।
14 अक्टूबर को एक बड़े नवरात्रि आयोजन में मंच से मुस्लिम समुदाय के लोगों और दूसरे धर्मों के लोगों से मैदान छोड़ने की अपील की गई। इस कार्यक्रम में मशहूर लोक गायक आदित्य गढ़वी ने प्रस्तुति दी थी, जो अपने लोकप्रिय गीत ‘खलासी’ के लिए भी जाने जाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान मंच संचालक ने ‘विधर्मी’ और मुसलमानों से स्वेच्छा से मैदान से बाहर जाने को कहा। इसके साथ ही उसने मंच से कहा कि विश्व हिंदू परिषद हिंदुओं की सुरक्षा के लिए वहां पहुंची है और एक हेल्पलाइन नंबर भी साझा किया।
आदित्य गढ़वी ने घटना से बनाई दूरी
मंच से की गई घोषणा के बाद विवाद बढ़ गया। इसके बाद गायक आदित्य गढ़वी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर घटना से खुद को अलग कर लिया।
गढ़वी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कहा कि उनके नाम पर बहुत कुछ कहा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों ने कार्यक्रम के बैकस्टेज पर कब्जा कर लिया था और ऐसी गतिविधि की, जिसका वह कभी समर्थन नहीं करते।
उन्होंने यह भी कहा कि न तो उनसे और न ही मंच संचालक से इस बारे में सलाह ली गई थी। उनके मुताबिक, वे दोनों इस घटना में किसी भी तरह शामिल नहीं थे।
धार्मिक पहचान के आधार पर रोक लगाने पर बहस
गरबा गुजरात में नवरात्रि का एक प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन है। ऐसे आयोजनों में गैर-हिंदुओं को बाहर करने की मांग ने धार्मिक पहचान, सार्वजनिक आयोजनों में भागीदारी और सामाजिक सद्भाव को लेकर बहस तेज कर दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, VHP और बजरंग दल जैसे संगठनों ने गुजरात के कई गरबा स्थलों पर गैर-हिंदुओं को प्रवेश से रोकने की कोशिश की है। कुछ स्थानों पर मुस्लिम कर्मचारियों और संगीतकारों को लेकर भी विवाद हुआ है।
इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा किया है कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में लोगों की भागीदारी तय करने का आधार क्या होना चाहिए और ऐसी पाबंदियों का सामाजिक सौहार्द पर क्या असर पड़ सकता है।
आयोजनों में बढ़ता तनाव चिंता का विषय
गरबा जैसे आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग हिस्सा लेते हैं। ऐसे में किसी समुदाय के लोगों को धार्मिक पहचान के आधार पर बाहर जाने के लिए कहना तनाव और आपसी अविश्वास को बढ़ा सकता है।
आदित्य गढ़वी ने घटना से अपनी असहमति जताई है, लेकिन मंच से की गई घोषणा ने आयोजन की व्यवस्था और उसमें शामिल लोगों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुजरात में नवरात्रि के दौरान इस तरह के विवादों का आगे क्या असर होगा, इस पर नजर बनी हुई है।



