ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 19 अक्टूबर 2026
11,440 करोड़ रुपये के मिशन पर सवाल
दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के उद्देश्य से शुरू किए गए केंद्र सरकार के मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेज के पहले साल में 500 करोड़ रुपये के शोध बजट से एक भी रिसर्च प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिली है। छह साल की अवधि वाले इस मिशन का पहला वर्ष 2025-26 समाप्त हो चुका है, लेकिन शोध परियोजनाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
कृषि मंत्रालय ने इस देरी को स्वीकार करते हुए रविवार को कहा कि प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है। मंत्रालय के मुताबिक, समिति की सिफारिश पर पात्र परियोजनाओं को अक्टूबर 2026 के अंत तक मंजूरी दिए जाने की उम्मीद है।
कैबिनेट सचिवालय ने जताई चिंता
शोध परियोजनाओं की मंजूरी में हो रही देरी का मामला कैबिनेट सचिवालय के स्तर पर भी उठाया गया है। सचिवालय ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से कहा है कि परियोजनाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी की जाए।
इससे पहले 5 अक्टूबर को कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में हुई बैठक में कृषि अनुसंधान की दिशा और प्राथमिकताओं की समीक्षा की गई थी। बैठक में तिलहन, दालों और कपास से जुड़े अनुसंधान को नए सिरे से व्यवस्थित करने के मुद्दे पर चर्चा हुई। इसी दौरान शोध परियोजनाओं की मंजूरी में देरी का मामला अधिकारियों ने उठाया।
छह साल में खर्च होंगे 11,440 करोड़ रुपये
मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेज को वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक छह साल में लागू किया जाना है। इसके लिए कुल 11,440 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। इसमें 500 करोड़ रुपये शोध परियोजनाओं के लिए निर्धारित हैं।
मिशन का उद्देश्य दालों के उत्पादन में देश की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। इसके लिए कृषि अनुसंधान और उत्पादन से जुड़े प्रयास अहम माने जा रहे हैं।
अक्टूबर के अंत तक मंजूरी देने का दावा
कृषि मंत्रालय ने कहा है कि शोध परियोजनाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया तेज की जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, समिति की ओर से अनुशंसित पात्र परियोजनाओं को अक्टूबर के अंत तक मंजूरी मिलने की उम्मीद है, यानी कैबिनेट सचिवालय की 15 नवंबर की समय-सीमा से पहले।
हालांकि, पहले साल में एक भी परियोजना को मंजूरी नहीं मिलने के कारण यह सवाल उठता है कि मिशन के शोध संबंधी लक्ष्यों को तय समय पर पूरा करने के लिए आगे कितनी तेजी से काम किया जाएगा।



