राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 13 अक्टूबर 2026
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच कांग्रेस ने विपक्षी आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने की रणनीति अपनाई है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए INDIA ब्लॉक के मार्च में छात्र संगठनों के नेताओं को प्रमुखता से शामिल करना इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। कांग्रेस ने इस कदम के जरिए विपक्षी दलों और छात्र आंदोलनों के बीच दूरी कम करने तथा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर व्यापक एकजुटता दिखाने की कोशिश की।
तिरंगे से सजे खुले ट्रक पर INDIA ब्लॉक के वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा। इस मार्च में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, RJD नेता तेजस्वी यादव और अन्य विपक्षी नेताओं ने हिस्सा लिया। छात्र नेताओं की भागीदारी ने इस प्रदर्शन को केवल राजनीतिक दलों की मुहिम से आगे बढ़ाकर छात्र राजनीति और नागरिक आंदोलनों से जोड़ने का संदेश दिया।
NSUI, SFI और AISA के नेता एक मंच पर
मार्च में NSUI की जन्नत बिश्नोई, SFI की राष्ट्रीय संयुक्त सचिव आइशी घोष और AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा सहित छात्र संगठनों से जुड़े नेता शामिल हुए। AISA से जुड़े और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एन. साई बालाजी ने भी मंच साझा किया।
यह दृश्य इसलिए महत्वपूर्ण रहा क्योंकि NSUI कांग्रेस से जुड़ा छात्र संगठन है, जबकि SFI और AISA वामपंथी छात्र राजनीति से जुड़े हैं। अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं वाले छात्र नेताओं का एक साथ मार्च में शामिल होना विपक्षी एकजुटता का संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा गया।
CPI(M) के महासचिव एम.ए. बेबी ने छात्र नेताओं की भागीदारी का स्वागत करते हुए इसे उनके योगदान की पहचान और प्रदर्शनकारियों की एकजुटता का संदेश बताया। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, छात्र संगठनों को साथ लाने के पीछे विपक्ष के आंदोलन का आधार बढ़ाने की रणनीति थी।
राहुल गांधी का संदेश—“सारे प्रदर्शन एक हैं”
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि सभी आंदोलन एक ही विरोध का हिस्सा हैं और उन्हें अलग-अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “सारे प्रदर्शन एक हैं। कोई समानांतर प्रदर्शन नहीं है। हमें फर्क नहीं पड़ता कि आप कौन हैं।”
राहुल गांधी ने विरोध की तुलना ‘शिव तांडव’ से भी की। उनका संदेश था कि संविधान और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर चल रहे आंदोलनों को व्यापक लोकतांत्रिक संघर्ष के रूप में देखा जाना चाहिए।
हालांकि, इसी बयान में राहुल गांधी ने Cockroach Janta Party (CJP) के प्रयासों को अलग से मान्यता नहीं दी। उन्होंने उसके प्रयासों को “छात्रों ने प्रदर्शन करने की कोशिश की” के रूप में संबोधित किया। इससे यह संकेत भी मिला कि विपक्षी एकता के व्यापक संदेश के बावजूद अलग-अलग संगठनों के बीच राजनीतिक स्थान और नेतृत्व को लेकर प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।
क्या कांग्रेस CJP को पीछे रखना चाहती है?
कांग्रेस की इस रणनीति का एक दूसरा राजनीतिक पहलू भी चर्चा में है। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के कुछ नेताओं ने छात्र नेताओं को प्रमुखता देने को CJP को आंदोलन के केंद्र से दूर रखने की कोशिश के रूप में भी देखा। कांग्रेस पहले भी इस नए संगठन को लेकर संदेह जताती रही है और उसे आम आदमी पार्टी से जुड़ा मंच बताती रही है। हालांकि, यह कांग्रेस के राजनीतिक आकलन हैं; इन्हें किसी स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
जुलाई में NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में CJP की भूमिका चर्चा में आई थी। उस समय कांग्रेस नेतृत्व ने आंदोलन की सफलता का श्रेय छात्रों को दिया था। अब CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध में छात्र नेताओं को INDIA ब्लॉक के प्रमुख नेताओं के साथ मंच देना कांग्रेस की रणनीति में एक नया कदम माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा ‘वोट चोरी’ का मुद्दा
सोमवार को विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट परिसर तक मार्च किया और कथित ‘वोट चोरी’ तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों पर नई याचिका दाखिल की। विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप उठा रहे हैं। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों, तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकलेगा।
मार्च से पहले विपक्षी नेताओं ने संविधान क्लब में बैठक कर याचिका के मसौदे और आगे की रणनीति पर चर्चा की। इस दौरान कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, RJD और वामपंथी दलों के नेताओं की मौजूदगी ने INDIA ब्लॉक के साझा अभियान को सामने रखा।
आंदोलन का विस्तार या नेतृत्व की नई लड़ाई?
छात्र संगठनों को साथ लाना कांग्रेस के लिए आंदोलन का दायरा बढ़ाने का अवसर है। इससे छात्र राजनीति, विपक्षी दलों और नागरिक आंदोलनों के बीच साझा मुद्दों पर सहयोग का रास्ता खुल सकता है। लेकिन CJP को लेकर पैदा हुआ अंतर यह भी बताता है कि एकजुटता के दावों के बीच आंदोलन का नेतृत्व और राजनीतिक श्रेय हासिल करने की प्रतिस्पर्धा पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि यह साझा मंच आगे भी कायम रहता है या अलग-अलग संगठनों की प्राथमिकताएं फिर सामने आती हैं। फिलहाल कांग्रेस ने छात्र नेताओं को प्रमुखता देकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि चुनावी प्रक्रिया और संविधान से जुड़े सवालों पर उसका आंदोलन केवल सांसदों तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्र संगठनों और व्यापक विपक्षी लामबंदी को भी साथ लेकर चलना चाहता है।



