अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 13 अक्टूबर 2026
दुनिया की आधुनिक सैन्य सुरक्षा प्रणालियों में शामिल एयर डिफेंस होने के बावजूद सऊदी अरब हूतियों के मिसाइल और ड्रोन हमलों को पूरी तरह रोक नहीं पा रहा है। यमन से सक्रिय हूती विद्रोही सऊदी अरब के हवाई अड्डों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बना रहे हैं। इन हमलों ने क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ सऊदी अरब की सैन्य तैयारियों पर भी सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका से मिले अत्याधुनिक रक्षा तंत्र के बावजूद कुछ हमले अपने लक्ष्य तक कैसे पहुंच रहे हैं?
13 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 10 अक्टूबर को हुए हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर सामने आई थी। इस हमले में घायल एक भारतीय नागरिक की बाद में मौत हो गई, जिसकी पुष्टि रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने की। रविवार को हवाई अड्डे पर हुए एक अन्य हमले में भी एक व्यक्ति की मौत की सूचना दी गई। सोमवार को सऊदी अधिकारियों ने नए मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी दी।
सऊदी अरब का कहना है कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने आने वाले कई प्रक्षेपास्त्रों को बीच में ही रोक दिया, लेकिन कुछ हमले अपने लक्ष्य तक पहुंच गए। सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने इन घटनाओं को गंभीर बताते हुए जवाब देने की चेतावनी दी है।
हूतियों के पास कौन-कौन से हथियार हैं?
यमन की राजधानी सना पर 2014 में नियंत्रण स्थापित करने के बाद से हूतियों की मिसाइल और ड्रोन क्षमता में विस्तार हुआ है। उनके शस्त्रागार में बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और हमला करने वाले ड्रोन शामिल बताए जाते हैं। इनमें मध्यम दूरी की फलस्तीन-2 मिसाइल और तूफान मिसाइल का नाम भी आता है। फलस्तीन-2 की अनुमानित मारक दूरी करीब 2,000 किलोमीटर बताई जाती है। इसके अलावा बुरकान और बद्र जैसे कम दूरी के मिसाइल संस्करण भी हूतियों के पास बताए गए हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, हूतियों की हथियार क्षमता पर ईरानी तकनीक का प्रभाव रहा है। हालांकि, ईरान हूतियों को हथियार और प्रशिक्षण देने के आरोपों से इनकार करता रहा है। हाल के हमलों में किस खास मिसाइल या ड्रोन का इस्तेमाल हुआ, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।
एक साथ मिसाइल और ड्रोन से हमला क्यों मुश्किल?
हूतियों की रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू अलग-अलग प्रकार के हथियारों का इस्तेमाल है। बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और ड्रोन गति, उड़ान की ऊंचाई और रडार पर दिखाई देने के तरीके में अलग होते हैं। जब कई तरह के हथियार एक साथ किसी लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं, तो उन्हें पहचानना, उनकी दिशा का अनुमान लगाना और समय रहते रोकना वायु रक्षा प्रणाली के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, रियाद हवाई अड्डे पर हमले की शुरुआती सऊदी जांच में इस संभावना की पड़ताल की जा रही थी कि पहले कई ड्रोन भेजे गए और फिर क्रूज तथा बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ। जांच में यह भी देखा जा रहा था कि रक्षा प्रणालियां पहले चेतावनी देने में क्यों नाकाम रहीं। ये शुरुआती निष्कर्ष थे और इन्हें हर हमले की रणनीति का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
पैट्रियट और THAAD होने के बाद भी चुनौती क्यों?
सऊदी अरब के पास अमेरिका में निर्मित पैट्रियट और THAAD जैसी उन्नत वायु रक्षा प्रणालियां हैं। लेकिन अत्याधुनिक उपकरण होने का अर्थ यह नहीं कि हर आने वाले मिसाइल या ड्रोन को रोकना सुनिश्चित हो जाता है।
सऊदी अरब का भूभाग विशाल है। उसे राजधानी रियाद, हवाई अड्डों, तेल प्रतिष्ठानों, सैन्य ठिकानों और आबादी वाले क्षेत्रों की एक साथ सुरक्षा करनी होती है। किसी एक क्षेत्र में रक्षा प्रणालियों को केंद्रित करने से दूसरे ठिकानों की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है।
इसके अलावा इंटरसेप्टर मिसाइलों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। एसोसिएटेड प्रेस ने सितंबर में क्षेत्रीय अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट किया था कि सऊदी अरब के पास इंटरसेप्टर मिसाइलों के भंडार पर दबाव था और उसने क्षेत्रीय तथा पश्चिमी सहयोगियों से रक्षा सहायता मांगी थी। हालांकि, सऊदी अरब के पास इस समय कितनी इंटरसेप्टर मिसाइलें उपलब्ध हैं, इसका सटीक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है। इसलिए हर नाकाम अवरोधन को गोला-बारूद की कमी से जोड़ना सही नहीं होगा।
यमन का संघर्ष और सऊदी अरब पर दबाव
हूती यमन के जायदी शिया समुदाय से उभरा एक सशस्त्र राजनीतिक आंदोलन है। उसने 2014 में राजधानी सना पर कब्जा किया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन में सैन्य हस्तक्षेप किया। वर्षों के हवाई हमलों के बावजूद हूतियों को उनके प्रमुख गढ़ों से पूरी तरह हटाया नहीं जा सका।
ताजा तनाव लाल सागर के तटीय क्षेत्रों में लड़ाई तेज होने के बाद बढ़ा है। यमन की सरकारी सेनाएं सऊदी हवाई समर्थन के साथ हूती ठिकानों के खिलाफ अभियान चला रही हैं। हूती इन हमलों को सऊदी सैन्य कार्रवाई का जवाब बता रहे हैं। उनका दावा है कि सऊदी हवाई अड्डों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले उसी जवाबी अभियान का हिस्सा हैं।
क्या हूती लंबे समय तक हमले जारी रख पाएंगे?
हूतियों के पास उपलब्ध मिसाइलों और ड्रोन की कुल संख्या सार्वजनिक रूप से ज्ञात नहीं है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के हमले उनके हथियार भंडार और ड्रोन निर्माण से जुड़े ठिकानों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे लंबी दूरी के हमलों को लगातार जारी रखने की उनकी क्षमता प्रभावित हो सकती है।
फिर भी, कुछ हथियारों की कमी का अर्थ यह नहीं कि खतरा पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। हूती उपलब्ध संसाधनों को चुनिंदा ठिकानों के खिलाफ इस्तेमाल कर सकते हैं। दूसरी ओर, सऊदी अरब को अपने महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा, समय रहते चेतावनी देने की क्षमता और इंटरसेप्टर मिसाइलों की आपूर्ति बनाए रखने पर ध्यान देना होगा।
सऊदी अरब के सामने चुनौती केवल मिसाइलों को रोकने की नहीं, बल्कि अपने विशाल भूभाग और महत्वपूर्ण आर्थिक प्रतिष्ठानों की लगातार सुरक्षा सुनिश्चित करने की है। हूतियों के हमलों का आगे क्या असर होगा, यह दोनों पक्षों के हथियार भंडार, सैन्य अभियानों और क्षेत्रीय संघर्ष की दिशा पर निर्भर करेगा।



